
प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई
जबलपुर. कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए गत मार्च में देश भर में लागू लॉकडाउन ने जहां लोगों का काम-काज छुड़ा दिया। काम-धंधा बंद हो गया तो लोग जैसे-तैसे अपने गांव-घर पहुंचे। ऐसे लोगो को मनरेगा के माध्यम से काम से जोड़ने की कोशिश शुरू हुई। लेकिन इन मजदूरों के बच्चों का बड़ा नुकसान हुआ। पिछले करीब 9-10 महीने से ये बच्चे शिक्षा से दूर हो गए। स्कूल खुले पर उनमें इनका दाखिला नहीं हुआ। इनके पास स्मार्ट फोन तो था नहीं कि ये स्कूलों से जुड़ कर पढ़ाई कर सकें। ऐसे में अब मध्य प्रदेश सरकार ने इन मजदूरों के बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्य धारा में लाने की पहल की है।
राज्य शिक्षा केंद्र आयुक्त लोकेश कुमार जाटव ने जबलपुर सहित प्रदेश के समस्त कलेक्टरों को पत्र भेजकर कहा है कि प्रवासी श्रमिकों के साथ घर लौटे बच्चों को शिक्षा की मुख्य से धारा से जोड़ने की पहल करें। जिला परियोजना समन्वयक सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों की मदद से ऐसे बच्चों को खोजकर उन्हें स्कूल पहुंचाएं।
राज्य शिक्षा केंद्र आयुक्त ने कहा है कि जिला परियोजना समन्वयक अपने जिले के समस्त शिक्षकों की मदद से श्रमिकों के साथ बड़े शहरों से अपने गांव-घर लौटे बच्चों के घर-घर जाकर अध्यापन कार्य कराए या फिर उन्हें स्कूल लाने का प्रयास करें। संभवत: हो सके तो ऐसे बच्चों को उनके घर पर ही जाकर पढ़ाए।
इस संबंध में शिक्षा विभाग अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि प्रवासी श्रमिक के बच्चों को स्कूल-छात्रावासों में प्रवेश दिलाया जाए। ब्रिज कोर्स के माध्यम से ऐसे बच्चों की पढ़ाई कराई जाए। इसके अलावा महिला बाल एवं विकास विभाग सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं के मार्फत इन बच्चों की मदद की जाए। बच्चों को चाइल्ड केयर में डालकर उनकी पढ़ाई शुरू कराई जाए।
बता दें कि प्रदेश में ऐसे करीब 1.15 लाख बच्चों को चिह्नित किया गया है। इसमें से 666 सिर्फ जबलपुर में हैं।
"जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में प्रवासी श्रमिक के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाना है इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। बीआरसी, जनशिक्षक सहित शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।"-आरपी चतुर्वेदी, जिला परियोजना समन्वयक
Published on:
05 Jan 2021 04:14 pm
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