22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मप्र सरकार इस शहर में बना रही 310 करोड़ के 3 स्पेशल अस्पताल, फंस रहा ये पेंच

मप्र सरकार इस शहर में बना रही 310 करोड़ के 3 स्पेशल अस्पताल, फंस रहा ये पेंच  

3 min read
Google source verification
super specialty hospital of india-mp

super specialty hospital of india-mp

जबलपुर। महाकोशल अंचल के मरीजों को सस्ता और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए बीते चार साल में नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में तीन आधुनिक अस्पताल शुरू करने की कवायद हुई। लेकिन, चार साल में लगभग 310 करोड़ रुपए की इन योजनाओं में एक का भी लाभ मरीजों को नहीं मिला। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी एक के बाद एक प्रोजेक्ट लादते गए। बार-बार प्राथमिकता और नीतियां बदलने का खामियाजा यह हुआ कि न तो अब तक सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल में मरीजों को इलाज मिला न स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का भवन आकार ले पाया। हार्ट, किडनी, कैंसर, टीबी और चेस्ट सम्बंधी बीमारियों की बेहतर जांच सुविधा का मरीजों का इंतजार भी जारी है।

news facts-

मेडिकल में योजनाएं अधूरी, सरकारी प्राथमिकता बार-बार बदलने से पूरा नहीं हुआ एक भी प्रोजेक्ट
310 करोड़ के 3 अस्पतालों का 4 साल से इंतजार

मेडिकल परिसर में बन रहे सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के भवन तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए 1.70 करोड़ रुपए की डीपीआर बनाई। दो आधुनिक अस्पताल के लिए जरूरी इस सडक़ के लिए राशि आवंटन में लेटलतीफी हुई। आधा किमी की सडक़ बनाने में दो बार ठेकेदार आधा काम करके भाग गया।

मेडिकल में मरीजों को तीनों प्रस्तावित अस्पतालों में जल्द ही आधुनिक जांच सुविधा उपलब्ध होगी। सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल को शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में है।
- शरद जैन, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री

फंड के एडजस्टमेंट में पिछड़े प्रोजेक्ट
- टीबी एंड चेस्ट विभाग का नया भवन बनाने का मसौदा बना। इस बीच स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का प्रस्ताव मिला। टीबी एंड चेस्ट विभाग का काम छोडकऱ स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की बुनियाद रखने की कवायद की।

- स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की नींव रखने के कुछ समय बाद ही सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल का प्रस्ताव मिला। कैंसर इंस्टीट्यूट की जगह विभाग ने पूरा फोकस सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल का भवन बनाने पर कर लिया।

- सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल का भवन जब बनकर तैयार हुआ तो प्रदेश में छिंदवाड़ा सहित सात मेडिकल कॉलेज खोलने पर पूरी ताकत लगा दी गई। इससे सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल का कार्य हाशिए पर चला गया।

- पांच करोड़ रुपए से टीबी एंड चेस्ट विभाग का भवन इस साल बनकर तैयार हुआ। तब तक इसे स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बनाने का प्रस्ताव बना लिया गया। इसके बाद अतिरिक्त फंड 20 करोड़ रुपए जुटाने की कवायद हुई।

Health news ,
Super Speciality
, government medical college in mp" src="https://new-img.patrika.com/upload/2018/08/25/sector-9_3353333-m.jpg">

सुविधाएं
छह आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और लीनियर एक्सीलेटर (कोबाल्ट मशीन)
एंडोस्कोपी, ब्रांकोस्कोपी, कोलोस्कोपी, काल्पोस्कोपी जांच सहित आधुनिक पैथोलॉजी।
विशेषज्ञ चिकित्सक, एकस्ट्रा स्किल्ड स्टाफ और सर्जरी के लिए आधुनिक उपकरण।
हर प्रकार के कैंसर की जांच, उपचार सहित रिसर्च का बड़ा सेंटर होगा।

सुविधाएं
टीबी, सांस और छाती से सम्बंधित सूक्ष्य और जटिल रोगों का उपचार
बीमारियों की जांच के लिए नई मशीनें। उन जांच की सुविधा जो प्रदेश में नहीं है।
सुपर स्पेशलिटी की तर्ज पर विशेषज्ञ चिकित्सक और एकस्ट्रा स्किल्ड स्टाफ।
एमपीड रिस्पायटरी मेडिसिन और पल्मोनरी मेडिसिन में डीएम की पढ़ाई होगी

सुविधाएं
नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, एंडोक्रायनोलॉजी के विशेषज्ञ। इससे जटिल बीमारियों का भी इलाज होगा आसान।
हार्ट, किडनी, लीवर संबंधी बीमारी से पीडि़त मरीजों जांच के लिए एडवांस मशीनें।
बायपास सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट और जटिल न्यूरो
सर्जरी होगी।
डीएम और एमसीएच डिग्रीधारी रहेंगे।
ये है खामियाजा
निर्माण कार्यों में विलम्ब से योजना की लागत में बढ़ोतरी हो गई।
योजना के लिए स्वीकृत राशि के अनुसार उपकरणों की कीमत में वृद्धि।
अस्पतालों में डॉक्टर सहित स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया पिछड़ी।
नई तकनीक और सस्ते जांच एवं उपचार से मरीज वंचित।
कॉलेज में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को आधुनिक प्रशिक्षण नहीं मिल रहा।