
MP: Thousands lawyers registration missing from Bar Council
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने जज पर पक्षपात का आरोप लगाने वाले सीनियर एडवोकेट के व्यवहार के लिए उनके खिलाफ मप्र बार काउंसिल से कठोरतम कार्रवाई करने की सिफारिश की। जस्टिस अतुल श्रीधरन की कोर्ट ने कहा कि इसके लिए आदेश की प्रति स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष को प्रेषित की जाए।
हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, मप्र बार काउंसिल से किया आग्रह
‘सीनियर एडवोकेट के व्यवहार पर करें कार्रवाई’
स्पेशल डीजीपी पुलिस रिफार्म शैलेश ङ्क्षसह की पत्नी सुनीता ङ्क्षसह ने अपने भाई प्रकाश ङ्क्षसह व भाभी नन्दिता ङ्क्षसह के खिलाफ भोपाल के हबीबगंज थाने में 2013 में धोखाधड़ी की एफआइआर दर्ज कराई। इसमे आरोप लगाया गया कि भाई और भाभी ने 64 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर चेक दिए, जो बंद एकाउंट के थे और बाउंस हो गए।
एफआइआर निरस्त करने का आग्रह
इसी एफआइआर को निरस्त करने का आग्रह करते हुए प्रकाश ङ्क्षसह व उसकी पत्नी नन्दिता ने यह मामला दायर किया था। कहा गया कि आइपीएस शैलेश ङ्क्षसह के दबाव में यह एफआइआर दर्ज की गई, लिहाजा निरस्त की जाए।
सुनवाई से हट जाओ, पक्षपात कर रहे
कोर्ट ने एफआइआर को अनुचित पाया और खारिज करने की मंशा जताई। इस पर सुनीता ङ्क्षसह की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र नारायण ङ्क्षसह भडक़ गए। उन्होंने कहा कि कोर्ट पक्षपात कर रही है। मामले की सुनवाई से कोर्ट को खुद को अलग कर लेना चाहिए। इस पर कोर्ट ने उक्त एफआइआर खारिज कर दी। तल्ख टिप्पणी कर कोर्ट ने कहा कि गरीबों के सच्चे मामलों में भी पुलिस एफआइआर दर्ज करने में उदासीनता बरतती है। ऐसे में इस तरह के मामले में तत्काल एफआइआर दर्ज किया जाना समझ से परे है।
कोर्ट ने कहा कि मप्र में दूसरे राज्यों की तुलना में स्थिति अच्छी है। यहां क्राइम रेट कम करने, रोकने की प्रवृत्ति कम है। कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता को वरिष्ठता का नामांकन केवल उसके ज्ञान, विद्वता और कानूनी कौशल के लिए नहीं दिया जाता। ऐसे वरिष्ठ अधिवक्ता से शिष्टता, धैर्य और अदालत के प्रति अनुग्रह भाव जरूरी होता है।
Published on:
09 Apr 2022 09:30 am
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