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High Court का अहम फैसला- मां भी नहीं बदल सकती वकील

अदालत ने कहा है कि आरोपी द्वारा किया गया वकील बदलने का अधिकार किसी और को नहीं है

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जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि आरोपी द्वारा नियुक्त वकील को बदलने का अधिकार किसी को नहीं है। यहां तक कि आरोपी की मां भी उसके द्वारा नियुक्त वकील को नहीं बदल सकती। एक मामले में आरोपी की मां द्वारा वकील बदलने के संबंध में दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह बात कही। हाईकोर्ट के जस्टिस जेपी गुप्ता की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया। इसी के साथ कोर्ट ने आरोपी की मां द्वारा वकील बदलने के संबंध में दायर याचिका निरस्त कर दी। इसके साथ ही एनडीपीएस के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी युवक की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई है।


यह है मामला
बिहार के भागलपुर जिले के खालेगांव थानांतर्गत शिकारगढ़ टोला में रहने वाले अमित कुमार को भोपाल पुलिस ने पकड़ा था। अमित को भोपाल की अशोका गार्डन पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तार किया था। आरोपी को 2 अप्रैल 2017 को 750 ग्राम चरस के साथ पकड़ा गया था। इस मामले में पुलिस द्वारा निचली अदालत में चार्जशीट पेश की गई। आरोपी अमित ने हाईकोर्ट मेे जमानत के लिए अर्जी दायर की। आरोपी की ओर से उसके अधिवक्ता ने दावा किया कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। इसका विरोध करते शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को कुछ अहम सुबूतों की जानकारी दी। पुलिस की ओर से कहा गया कि पुलिस ने आरोपी और उसके एक साथी को मोटरसाइकिल से जाते हुए पकड़ा था। इन आरोपियों के पास से अवैध चरस की बड़ी मात्रा बरामद की गई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी को यदि जमानत का लाभ दिया गया तो चूंकि वह बिहार का रहने वाला है इसलिए ट्रायल के दौरान उसकी उपस्थिति मुश्किल हो जाएगी। इसी मामले पर हुई सुनवाई के दौरान आरोपी की मां की ओर से भी याचिका दायर की गई। इस याचिका में आरोपी की मां ने वकील बदलने की अनुमति देने की बात कही थी।


नहीं बदल सकते वकील
इन दोनों अर्जियों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुने। इसके बाद दोनों अर्जियां खारिज कर दी गई। अर्जी खारिज करते हुए अदालत ने साफतौर पर कहा कि आरोपी द्वारा नियुक्त किया गया वकील बदलने का अधिकार किसी और को नहीं है। आरोपी को जमानत का लाभ देने से इंकार करते हुए उसकी जमानत अर्जी भी अदालत ने खारिज कर दीं।