
MP High Court
जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने कहा है कि 'चाहे जो भी मसला हो, किसी को भी कानून हाथ में लेकर पुलिस अधिकारियों से मारपीट की इजाजत नहीं दी जा सकती। जस्टिस एचपी सिंह की सिंगल बेंच ने कहा कि 'बेशक आवेदिका यह बचाव ले सकती है कि छेड़छाड़ के चलते घटना हुई। लेकिन, इस तरह की घटनाआें से पुलिस अधिकारियों, सरकारी कर्मियों का मनोबल गिरता है। इस मत के साथ बेंच ने भोपाल निवासी महिला की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
यह है मामला
भोपाल के अवधपुरी इलाके में रहने वाली 35 वर्षीय अपर्णा शर्मा ने जमानत की अर्जी दायर की थी। इसमें कहा गया कि उसकी दुकान है। वह एक दिसम्बर की रात दस बजे पति धनंजय शर्मा और बच्चे के साथ भेल दशहरा मैदान में लगे भोजपाल मेले में पहुंची थी। उसने अपनी कार गोविंदपुरा थाने के बाहर पार्क की थी। वापस लौटी, तो शराब के नशे में धुत पुलिसकर्मी नरेश बघेल कार खड़ी करने को लेकर अश्लीलतापूर्वक विवाद करने लगा। शिकायत की बात करने पर वह भागने लगा। उन्होंने पति के साथ पीछा कर महात्मा गांधी चौराहे पर उसे पकड़ा, जहां सिपाही ने उनके साथ मारपीट की। इसके बावजूद लोगों की मदद से वह उसको पकड़कर थाने लाई। घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था।
अफसरों के कहने पर नहीं की एफआईआर
पुलिस अधिकारियों ने उसे कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर उसने एफ आईआर दर्ज नहीं कराई। लेकिन, चार दिसम्बर को उस पर ही मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। आवेदिका की ओर से अधिवक्ता अजय गुप्ता ने तर्क दिया कि छेड़छाड़ व अश्लीलता के आरोप को दबाने के लिए यह एफआईआर दर्ज की गई। इस मत के साथ बेंच ने भोपाल निवासी महिला की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। इसके बावजूद लोगों की मदद से वह उसको पकड़कर थाने लाई।
सरकार ने कहा-पेट्रोलिंग पर था
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जिस आरक्षक नरेश पर आरोप लगाया जा रहा है, वह घटना की रात मेले की पेट्रोलिंग कर रहा था। आवेदिका व उसके पति से उसका विवाद हुआ। इस पर दोनों ने पीछा कर उसकी पिटाई की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अर्जी निरस्त कर दी।
Published on:
30 Dec 2017 05:40 am

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