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मेडिकल यूनिवर्सिटी की परीक्षा में बैठे बिना ही हुए पास, सवालों के घेरे में व्यवस्था

प्रशासनिक नियंत्रण के बाद जारी है पास-फेल का खेल

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medical university

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जबलपुर। मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के दामन से गड़बड़ियों का दाग छूट नहीं रहा है। पुरानी धांधलियों पर कार्रवाई का शिकंजा पूरी तरह अभी कस भी नहीं पाया है कि एक बार फिर पास-फेल का खेल सामने आया है। इस बार इसे महज टंकन त्रुटि मानकर जल्दी लीपापोती शुरू कर दी गई है। लेकिन, रिजल्ट निर्माण के अलग-अलग चरणों में जांच के दौरान भी फेल-पास की गड़बड़ी पकड़ में नहीं आने से व्यवस्था सवालों के घेरे में है।

प्रशासनिक नियंत्रण के बाद भी मेडिकल यूनिवर्सिटी रिजल्ट में गड़बड़ियों से उबर नहीं पा रही है। लगातार कोई न कोई चूक हो रही है। नया मामला पैरामेडिकल परीक्षा-परिणाम से जुड़ा है। इसके रिजल्ट संबंधी कामकाज में लापरवाही की पोल विवि के दस्तावेज ही खोल रहे हैं। जिसमें परीक्षा में पास उम्मीदवार फेल हो गए। जो परीक्षा में बैठे ही नहीं, उन्हें उत्तीर्ण होने की अंकसूची दे दी गई। इन गंभीर त्रुटियों को भी अधिकारी पकड़ नहीं पाए। छात्र-छात्राओं ने शिकायत की तो संशोधित परीक्षा परिणाम जारी करके कारनामों पर परदा डाल दिया गया।

इसलिए उठ रहे सवाल

विवि में परीक्षा परिणाम से संबंधित प्रक्रिया संवेदनशील होती है। इस गोपनीय काम में मामूली चूक छात्र के करियर को प्रभावित करती है। रिजल्ट में त्रुटि की गुंजाइश न रहे, इसलिए टेब्यूलेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ताकि अंक दर्ज करने में कोई चूक हुई हो तो उसे पकड़ लिया जाए। लेकिन, विभिन्न चरणों के बाद गलत अंक के साथ अंकसूची की सीट तक आसानी से जारी हो जा रही है।

कार्यपरिषद से सब रफा-दफा
परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की शिकायतें आने पर मामलों को कार्यपरिषद की बैठक में रखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार चार से पांच सदस्य मिलकर सभी मामलों पर निर्णय कर रहे हैं। ज्यादातर मामलों में टंकन त्रुटि बताकर संशोधित परिणाम जारी हो रहे हैं। पैरामेडिकल के रिजल्ट मैनुअली तैयार किए जाने का हवाला देकर भी गड़बड़ी का बचाव किया जा रहा है।

ये कारनामे उजागर
- 14 जुलाई को घोषित बीपीटी थर्ड इयर के परीक्षा परिणाम में एक छात्रा को उत्तीर्ण बताया गया। ये छात्रा एक प्रश्न पत्र में शामिल ही नहीं हुई थी। ऐसा बीपीटी सेकेंड इयर में भी हुआ।

- ग्वालियर के एक कॉलेज के वर्ष 2018 बैच के डीएमएलटी छात्र के 25 जून को जारी रिजल्ट में बायोकैमेस्ट्री में 51 अंक दर्ज थे। जबकि उसे संबंधित प्रश्न पत्र में 90 अंक प्राप्त हुए थे।

- बीपीटी फर्स्ट इयर के 18 जुलाई को जारी किए गए परीक्षा परिणाम में एक ही रोल नंबर संबंधित रिजल्ट सीट में सौ से ज्यादा बार दर्ज था।

- इंदौर के एक पैरामेडिकल कॉलेज की छात्रा के पीटी इथिक्स मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन न्यूस विषय में 52 अंक थे। रिजल्ट में 2 अंक दर्शाया गया था।

- 15 जून को जारी बीपीटी प्रथम वर्ष के रिजल्ट में गड़बड़ी की शिकायत हुई। इसमें एक परीक्षा केन्द्र के छात्र-छात्राओं के नंबर में अंतर थे।

- भोपाल के एक पैरामेडिकल कॉलेज में 2018 बैच की एक छात्रा के 25 जून को जारी परिणाम में एक विषय में 40 नंबर थे। जबकि छात्रा को 77 अंक प्राप्त हुए थे।