हद है, MP में अब पुलिस वाले भी करने लगे Fraud

-पुलिस अधीक्षक की जानकारी में आते ही शुरू हुई Fraud की जांच
-आरोपी की पुष्टि के बाद आरोपी गिरफ्तार, निलंबित

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 01 Apr 2021, 11:05 AM IST

जबलपुर. हद है, एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार महिला अपराधों पर नियंत्रण को ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क खुलवा रही है। मकसद है कि इस डेस्क से महिलाओं को लाभ मिलेगा। त्वरित न्याय होगा। इस डेस्क पर महिलाएं होंगी तो पीड़ितों को अपनी बात कहने में आसानी होगी। लेकिन जबलपुर में महिला आरक्षक के नेतृत्व में ही धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस केस के उजागर होने के बाद पुलिस की आमजन के बीच खूब किरकिरी हो रही है। बताया जा रहा है कि MP में अब पुलिस वाले भी करने लगे Fraud, हालांकि इसकी भनक लगते ही पुलिस अधीक्षक ने जांच शुरू करा दी है। मामला सिविल लाइंस थाने का है। थाने के स्तर से पहले तो मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया गया लेकिन मामला खुल ही गया।

जानकारी के मुताबिक सिविल लाइंस थाने में तैनात महिला प्रधान आरक्षक और एक अन्य आरक्षक मिल कर युवाओं को गुमराह करने में संलग्न थे। इनका एक साथी भी था जो युवाओं को जालसाजी का शिकार बनाता रहा। ये तीनों मिल कर युवाओं को फांसते रहे और उन्हें पुलिस में नौकरी दिलाने के नाम पर चूना लगाया करते थे। शुरूआती दौर में इसका पता चलने पर थाना स्तर पर इस पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। लेकिन जैसे ही पुलिस अधीक्षक को पता चला उन्होंने एएसपी ट्रैफिक को जांच सौंप दी। बताया जा रहा है कि आरोप की पुष्टी भी हो गई है। साथ ही सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज भी हो गया है। इसके अलावा तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस तीनों की दो दिन की रिमांड लेकर पूछताछ कर रही है।

बताया जाता है कि लक्ष्मी झारिया, दीपक, सुनील, कुमकेश, प्रज्ञेश, गोविंद कुलस्ते, लल्लू सिंह, ब्रजेश पाठक, रूपेश श्रीपाल सहित अन्य लोगों ने एसपी को शिकायत पत्र देकर ठगी की शिकायत की। बताया कि 838 पुलिस लाइन क्वार्टर निवासी अनीता ने पुलिस में नौकरी लगवाने के नाम पर चार-चार लाख रुपए लिए हैं। इस रैकेट में शामिल आरोपियों के नाम चौंकाने वाले थे, क्योंकि आरोपियों में प्रधान आरक्षक देववती कुलस्ते, सूरज बघेल व अनिता बघेल शामिल हैं। इसमें सूरज बघेल आरक्षक है। उसे अनुकंपा पर नियुक्ति मिली है। अनीता बघेल उसकी मां है। पिता एएसआई थे। उनके आकस्मिक निधन के बाद बेटे सूरज को नौकरी मिली थी। अनीता खुद को आईजी ऑफिस में कार्यरत होना बताती थी। युवाओं को झांसे में लाने के लिए बताती रही कि वह 2012 से लोगों को भर्ती करा रही है।

एसपी ने इस मामले की जांच एएसपी ट्रैफिक संजय अग्रवाल से कराई। जांच में ठगी की पुष्टि हुई। आरोपियों ने ठगी की रकम से वाहन, जेवर आदि खरीदे हैं। एसपी के निर्देश पर सिविल लाइंस थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को दो दिन की रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ में जुटी है।

सिविल लाइन थाना प्रभारी धीरज राज का कहना है कि तीनों आरोपी 2017 से ठगी में लिप्त हैं। अब तक प्राप्त शिकायत के अनुसार आरोपियों ने 20-22 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है। ठगी की रकम से आरोपियों ने जेवर, वाहन सहित अन्य निवेश किए है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। एसपी ने एफआईआर के बाद महिला प्रधान आरक्षक व आरक्षक को निलंबित कर दिया है। आरोपियों की बर्खास्तग करने की भी तैयारी है।

हालांकि इस मामले का पर्दाफाश सिविल लाइंस पुलिस पहले ही कर सकती थी लेकिन थाने की पुलिस ने आरोपियों से पीड़ितों का समझौता करा दिया। सिविल लाइंस पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच एक हजार रुपए के शपथ पत्र पर समझौता कराया था। इसक बाद पीड़ितों ने एसपी से शिकायत की। तब आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और उनकी गिरफ्तारी हुई। प्रकरण सामने आने के बाद पिछले चार साल में ठगी के शिकार लोगों के सामने आने की बात कही जा रही है।

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