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BIG NEWS: यहां नामी बड़े अस्पताल फैला रहे है गंभीर बीमारी, सरकार के नोटिस के बाद मचा हड़कंप

63 अस्पतालों को घोषित किया अवैध, 15 दिन में जवाब नहीं दिया तो बड़ी कार्रवाई की तैयारी

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जबलपुर। शहर के जिन अस्पतालों में लोग बीमार पडऩे पर उपचार के लिए जा रहे है वे हॉस्पिटल ही उनकी सेहत खराब कर रहे है। इन अस्पतालों की एक करतूत से लोगों को गंभीर रोग का खतरा बढ़ गया है। आम लोगों की सेहत पर मंडराते खतरे से परेशान राज्य सरकार ने शहर के 63 अस्पतालों को नोटिस जारी किया है। पर्यावरण संबंधी मानकों की पालना में लापरवाही पर इन अस्पतालों का संचालन अवैध घोषित किया गया है। इसमें शहर के नामी-गिरामी हॉस्पिटल तक शामिल है। नोटिस जारी होने के बाद हड़कंप की स्थिति है।

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इसलिए नोटिस जारी
शहर के कई प्राइवेट अस्पताल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) से अनुमति लिए बिना संचालित है। पीसीबी ने बिना अनुमति अस्पताल का संचालन करने व प्रदूषक तत्वों का उत्सर्जन करने के मामले में 63 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है। बोर्ड ने अस्पताल संचालकों को प्रदूषण निवारण व नियंत्रण अधिनियम 1974, 1981 व 1986 के नियम व प्रावधानों का उल्लंघन करने पर नोटिस दिया है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि चिन्हित अस्पतालों में जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन व हथालन नियम 1998 के तहत कार्यालय द्वारा प्रदत्त वैद्यता समाप्त हो चुकी है। इस अवधि के बाद बिना प्राधिकार के अस्पताल का संचालन कर जीव चिकित्सा अपशिष्ट उत्पन्न किया जा रहा है।

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जानबूझकर उल्लंघन
पीसीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएन द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को जीव चिकित्सा अपशिष्ट व दूषित जल उपचार की व्यवस्था करने भी निर्देशित किया था, लेकिन इस दिशा में पहल नहीं हुई। अस्पतालों को जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जान-बूझकर जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम व जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम २०१६ के प्रावधान का उल्लंघन किया जा रहा है।

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15 दिन में मांगा जवाब
पीसीबी के अनुसार जानबूझकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने के मद्देनजर ये भी निर्देशित किया है कि पर्यावरणीय अधिनियमों के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराएं। अन्यथा कारण स्पष्ट करें। एेसा नहीं किए जाने पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध न्यायालयीन वाद भी दायर किया जा सकता है। नोटिस का जवाब प्रस्तुत करने के लिए १५ दिन का समय दिया गया है। जीवन चिकित्सा अपशिष्ट एवं दूषित जल उपचार की व्यवस्था के अभाव में इनके छोड़े जाने पर गंभीर संक्रमण होने का अंदेशा है।