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मप्र में जनसंख्या वृद्धि, पूरे देश की जनसंख्या वृद्धि से ज्यादा

जनसंख्या वृद्धि के खिलाफ मुख्य सचिव को लीगल नोटिस

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population control law

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जबलपुर। जनसंख्या वृद्धि पूरी दुनिया के लिए परेशानी बनती जा रही है। हर देश अपने अपने स्तर पर नीतियां लागू कर इस पर नियंत्रण का प्रयास कर रहा है। वहीं भारत देश में इस पर अभी बहस चल रही है। कुछ राज्यों ने अपने अपने स्तर पर इसे लागू करने का निर्णय भी ले लिया है। वहीं मप्र की बात करें तो एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। जिसमें पाया गया है कि प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। जानकारों के अनुसार पिछले एक दशक में यह 20 फीसद है, जबकि राष्ट्रीय औसत 17 फीसद है। दिग्विजय सरकार ने राज्य में जनवरी 2000 में जनसंख्या नीति लागू की थी, लेकिन पिछले 21 साल में इस नीति की न तो समीक्षा, न विश्लेषण किया गया। अत: जनसंख्या दर घटाने की कार्रवाई आवश्यक है। अब हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रदेश सरकार को लीगल नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे ने इस आशय का लीगल नोटिस राज्य के मुख्य सचिव को भेजा है। उन्होंने बताया कि बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करने के लिए के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 1976 में यह बिंदु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 में शामिल किया था। राज्यों में नियम बनाने के अधिकार सौंपे थे, लेकिन इन 45 वर्षों में व राज्य में जनसंख्या नीति बनने के 20 वर्षों में ठोस प्रयास नहीं किए गए।
मंच के नयागांव, जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव, अनिल पचौरी, डॉ. एबी श्रीवास्तव, डीआर लखेरा, डॉ. एमएसबी राव, एडवोकेट प्रभात यादव ने बताया कि जनसंख्या दर घटाने से ही शुद्ध हवा, स्वास्थ्य, विकास, निवास, शिक्षा, जीवन-स्तर की सुविधाएं आदि भारतीय संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकार नागरिकों के लिए सुरक्षित रहेंगे।