
15 दिन में सुधर जाएंगी इंदौर की प्रमुख सड़कें- Demo pic
MP Roads : ठेका हथियाने के लिए टेंडर की निर्धारित दर से 10 से 25 फीसदी तक कम दर की चाल चलने वाले ठेकेदारों पर लोक निर्माण विभाग अब शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। टेंडर की तय दर से नीचे की दर भरने वाले ठेकेदारों को टेंडर अलॉट होने पर अंतर की राशि की फिक्स डिपॉजिट(एफडी) जमा करानी होगी। पहले बैंक गारंटी लगाकर फुर्सत हो जाते थे। वहीं, विभाग प्रदेश की सडक़ों के निर्माण में तेलंगाना मॉडल अपनाएगा।
दरअसल, प्रदेश में निर्माण के ठेकों में गलाकाट स्पर्धा की स्थिति बनी हुई है। आलम यह है कि लागत दर से कम में भी टेंडर भर रहे हैं। इससे बाहर की बड़ी कम्पनियां प्रदेश में नहीं आ पातीं। बैंक गारंटी के दस्तावेज लगाए जाने से काम आसान हो जाता है। जिसका असर काम की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। अब निविदा दर से ठेकेदार की दर जितनी कम होगी उसके बदले नकदी में बनने वाली एफडी उसे जमा करानी होगी। ऐसा नहीं कर पाने पर टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा। शर्त के मुताबिक अंतर की राशि की एफडी संबंधित निर्माण की गारंटी अवधि तक जमा रहेगी।
मिलावट की आशंका को देखते हुए लोक निर्माण विभाग अब सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों से ही डामर और बेटुमन केमिकल की खरीदी करेगा। तेलंगाना मॉडल के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी की रिफाइनरी से केमिकल लोड होने के बाद डिजिटली लॉक कर दिया जाएगा। यह जिस साइट पर पहुंचेगा वहां के प्रभारी के पास इसका पासवर्ड होगा और वही इसे खोल सकेगा। दरअसल, यह कदम मिलावट और गुणवत्ता की शिकायतों पर कुछ इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बाद उठाया गया है।
लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जाने वाले निर्माण कार्यों खासतौर से टिकाऊ सडक़ों के निर्माण के लिए विभाग ने अफसरों को तेलंगाना और गुजरात अध्ययन के लिए भेजा था। उन्हें तेलंगाना में पता चला कि वहां डामर की सडक़ औसतन सात साल तक चलती है। लेकिन मध्यप्रदेश में यह औसत इसके आधे के बराबर है। कई सडक़ें तो एक बरसात भी नहीं झेल पाती हैं।
MP Roads : निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। गड़बड़ी की शिकायत पर आठ इंजीनियरों पर छह माह में कार्रवाई की है। विभाग की टीम तेलंगाना और गुजरात भेजी गई थी। उसने सडक़ों का अवलोकन कर गुणवत्ता को बेहतर करने के तरीके समझे हैं। ठेकेदारों से लेकर अधिकारियों को और अधिक जवाबदेह बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। उसमें जांच के लिए साफ्टवेयर का इस्तेमाल, क्यूआर कोड से सैंपल को भेजना, ठेकेदारों से एफडी जमा कराने जैसे निर्णय शामिल हैं।
Updated on:
19 Mar 2025 11:02 am
Published on:
19 Mar 2025 10:56 am
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