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जबलपुर. मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से एक बच्ची की आंखों की रोशनी चले जाने से जुड़े एक मामले में शहर के आयुष्मान चिल्ड्रन अस्पताल को 85 लाख रुपए चुकाने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई आयोग के सदस्य एके तिवारी, श्रीकांत पांडे और डीके श्रीवास्तव की युगलपीठ के समक्ष हुई। मासूम बच्ची के पिता ने 19 वर्ष तक केस लड़ा, अब आए फैसले में उनकी बड़ी जीत हुई है।
#CourtNews मप्र राज्य उपभोक्ता आयोग का निर्णय, मेडिकल लापरवाही का मामला
आयोग में बच्ची के पिता शैलेंद्र जैन की ओर से पेश की गई अपील अधिवक्ता दीपक जोशी ने आयोग को बताया कि 2004 में आवेदक ने अस्पताल की लापरवाही की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी जन्म के समय प्रीमेच्योर थी। चिकित्सकों के परामर्श पर आयुष्मान चिल्ड्रन अस्पताल में इनक्यूबेटर में रखा गया। कुछ दिन बाद बच्ची ठीक हो गई, परिवार इससे काफी खुश था। पर यह खुशी तब काफूर हो गई, जब पता चला कि बच्ची की आंख से रोशनी ही गायब हो गई है। परीक्षण में सामने आया कि उसे रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी है। यह इनक्यूबेटर में ऑक्सीजन के अत्यधिक डोज के कारण हुई। इसको लेकर अस्पताल की लापरवाही सामने आई।
मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने कहा कि पीड़ित बच्ची का दृष्टिबाधित होने के पीछे अस्पताल एवं चिकित्सकों की उपेक्षा है। इससे उसके भावी जीवन पर प्रभाव पडऩे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उसकी आजीविका अर्जित करने की क्षमता भी, आंखों की कमी के कारण प्रभावित रहेगी।
ब्याज के साथ चुकाने होंगे 85 लाख रुपए
आयोग में पेश अपील मेें अस्पताल के प्रोपराइटर व पार्टनर डॉ मुकेश खरे को पार्टी बनाया था। आयोग पारित आदेश में 60 दिन के अंदर 40 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने को कहा है। इस रकम पर 12 अप्रैल 2004 से भुगतान दिनांक तक 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा। जिसकी राशि 45 लाख रुपए के करीब है। यह भी चेतावनी दी है कि 60 दिन के अंदर अगर राशि नहीं दी जाती है तो इस पर आदेश से भुगतान दिनांक तक 8 प्रतिशत का ब्याज देना होगा।
Published on:
26 Sept 2023 03:18 pm
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