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Research: मृत कीड़े के फंगस से उगाया मशरूम, बना दिया इम्यूनो मॉड्यूलेटर

रिसर्च: मृत कीड़े के फंगस से उगाया मशरूम, बना दिया इम्यूनो मॉड्यूलेटर  

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jabalpur/ आज कोरोना महामारी से पूरा विश्व लड़ रहा है। इसकी दवाई बनाने बड़े बड़े देश दिन रात जुटे हैं। वहीं डॉक्टर व सरकारें लोगों को स्वस्थ्य खानपान की सलाह दे रही हैं। ताकि कोरोना समेत अन्य बीमारियों से लडऩे के लिए इम्युनिटी बढ़ सके। इस इम्युनिटी सिस्टम को दुरुस्त करने मार्केट में बहुत सारे इम्युनिटी बूस्टर मौजूद हैं, लेकिन रादुविवि के बायो डिजाइन इनोवेशन सेंटर जबलपुर(डीआईसी) ने एक ऐसा इम्यूनो मॉड्यूलेटर तैयार कर लिया है जो बना तो एक कीड़े के फंगस में ऊगे मशरूम (कॉर्डीसेप्स मिलिटेरिस) से है, लेकिन इसकी खासियत है कि ये किसी भी रोग से लडऩे के लिए मानव शरीर को मजबूत बना देता है।


कीड़ा जड़ी से बनाया इम्यून बूस्टर
प्रो. एसएस संधु ने बताया कि हिमालय के तराई वाले इलाकों में एक कीड़ा पाया जाता है। जिसे कीड़ा जड़ी भी कहते हैं। इसकी डिमांड यूरोपीय देशों में एक हर्बल वियाग्रा के रूप में है, जबकि चीन में इसे ताकत की दवा के रूप में लिया जाता है। खासकर स्पोट्र्स पर्सन इसे लेते हैं। ये कीड़ा जब मरता है तो इसके शरीर से एक फंगस निकलती है जो पौधे या मशरूम का रूप ले लेती है। जिसे अंग्रेजी में कॉर्डीसेप्स मिलिटेरिस भी कहा जाता है। इसकी कीमत भारत में दो से तीन लाख रुपए किलो है। हम जबलपुर से इसे 3 हजार रु. में खरीदकर लाए थे।

ऐसे काम करता है
प्रो. एसएस संधु बताते हैं कि कीड़ा जड़ी के फंगस से पैदा हुए मशरूम से बना इम्यूनो मॉड्यूलेटर इंसान की बॉडी के इम्यून सिस्सम मॉडिलेट करता है। जिससे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युन सिस्टम इतना मजबूत हो जाता है कि वह हर रोग से लडऩे में सक्षम हो जाता है। इस रिसर्च का एक कारण ये भी है कि बाजार में उपलब्ध जितने भी इम्युनिटी बूस्टर हैं या तो वे रासायनिक है या आम आदमी की पहुंच से दूर हैं। हमारी खोज एक आम आदमी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है।

कैंसर नहीं होने देता, बीमारियों से बचाता है
डीआईसी डायरेक्टर प्रो. एसएस संधु ने कॉर्डीसेप्स मिलिटेरिस का उपयोग करने पर कैंसर होने की संभावना करीब करीब खत्म हो जाती है। इस पर कई पेपर देश विदेश में पब्लिश हो चुके हैं। जिसे मेडिकल साइंस से भी सराहा गया है। इसके अलावा मशरूम को सीधे पावडर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही इसके माइक्रो तत्वों से अन्य जटिल रोगों और शारिरिक व्याधियों पर डीआईसी रिसर्च कर रहा है।