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जल की रानी को मिली मौत की सजा… आपको भी द्रवित कर देगा ये वीडियो

जल की रानी का मौत की सजा

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mysterious death of fish in pond

तालाब में मछलियों की रहस्यमय मौत

जबलपुर। कभी 52 तालाब और 84 खूबसूरत तलैयों के लिए विख्यात रहे जबलपुर में अब चंद तालाब ही बचे हैं। इनकी सुरक्षा और खूबसूरती को भी लापरवाही का ग्रहण लगा हुआ है। इसका एक और उदाहरण मछलियां की मौत के रुप में सामने आया। पहाडिय़ों के बीच सूपे जैसी बनावट के लिए पहचाने जाने वाले सूपाताल में हजारों की तादाद में मछलियां मर गई हैं। सुबह इनकी दुर्गंध इलाके में फैल गई। लोगों ने देखा तो उन्होंने नगर निगम को सूचना दी। हालांकि नगर निगम ने अब तक कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया है।

दुखी हुआ लोगों का मन
तालाब में मछलियों के मारे जाने की खबर सुनकर भारी संख्या में आसपास के लोग वहां पहुंच गए। उन्होंने नगर निगम की व्यवस्थाओं को जमकर कोसा। स्थानीय अभिषेक पाठक ने कहा कि मछलियां नगर निगम और जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के कारण मारी जा रही हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे जान बूझकर इनको मौत सजा दी गई हो। शशि ताम्रकार का कहना है तालाब में बने कैफेटेरिया के अलावा नालियों से बहकर आ रही गंदगी भी तालाब में समा रही है। यही मछलियां की मौत का कारण बन रही है। भूजल विद विनोद दुबे व पर्यावरण विद प्रो. एचबी पालन का कहना है कि गंदगी व प्रदूषण की वजह से देवताल ही नहीं बल्कि अन्य तालाबों के पानी में भी डिजाल्व ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया है। यही इनकी मौत का कारण बन रहा है। तालाब में जलीय जीवों को ऑक्सीजन मिले, इसे उद्देश्य से यहां फव्वारे भी लगाए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में वे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। तालाब बदहाल है।

गोकलपुर तालाब में भी हुआ था यही हाल
झील के नाम से प्रसिद्ध रहे गोकलपुर तालाब के तटीय क्षेत्र उदय नगर और रामनगर सहित अन्य जगहों पर भी कुछ समय पूर्व मछलियां मारी गई थीं। अचानक भारी तादाद में मछलियों के मरने से स्थानीय लोग भी स्तब्ध रह गए थे। मरी मछलियों की संख्या बहुत अधिक होने से इससे आसपास के क्षेत्र में बदबू फैलने लगी थी। लोगों की शिकायत पर यहां नगर निगम द्वारा सफाई कार्य कराया गया था।

बड़ा मछली पालन केंद्र
उल्लेखनीय है कि गोकलपुर तालाब बड़ा मछली पालन केन्द्र है। मछुआ मजदूर सहकारी समिति को इसका ठेका दिया गया है। समिति में 85 से अधिक मछुआरे पंजीकृत हैं। तालाब से प्रतिदिन 2 से 3 क्विंटल मछली निकाली जाती है। इसकी कीमत 50 हजार से अधिक होती है। मछली पालन के साथ तालाब की सफाई भी समिति के मछुआरे करते हैं। वर्तमान में तालाब की सफाई नहीं होने से गंदगी बढ़़ती जा रही है। तालाब में आसपास के रहवासी इलाकों के अलावा कई नालों का पानी भी मिलता है। इससे तालाब का पानी दूषित हो रहा है।