
Mysterious Trishul Bhed of Narmada
जबलपुर। पितरों का तर्पण व मोक्ष प्राप्ति की कामना रखने वाले अधिकतर परिजन गंगा के गयाजी तीर्थ पर जाते हैं, जबकि नर्मदा तट पर ऐसे तीर्थ मौजूद हैं जो गयाजी तीर्थ के समान पुण्यदायी व मुक्तिदायिनी मना गया है। इनमें से एक त्रिशूल भेद है, जो जबलपुर जिले से प्रवाहित होती नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थापित हैं। यहां की मान्यता है कि जो भी परिजन अपने पितरों व पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान करता है उसे सीधे मोक्षगति प्राप्त होती है। स्कंद पुराण के रेवाखंड में इस तीर्थ का उल्लेख मिलता है।
अस्थि विसर्जन से आत्मा को होती है मुक्ति की प्राप्ति, अस्थियों के साथ डूब जाता है हल्का कोयला
नर्मदा साधक व ज्योतिषाचार्य पं. विचित्र महाराज ने बताया नर्मदा समस्त तीर्थों की जननी मानी जाती है। ये ब्राह्मण्ड की सबसे पुरानी नदियों में शामिल हैं। त्रिशूल भेद में देवों व देव राजाओं के द्वारा अपने पितरों का तर्पण आदि किया गया है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मांड का पहला श्राद्ध भी मां नर्मदा के तट पर ही पितरों द्वारा स्वयं किया गया था। रेवाखंड में त्रिशूल भेद के लिए कहा गया है- यथा हि गया शिर: पुण्यं, पूर्व मेव पठयते तथा रेवा तटे पुण्यं शूल भेद न संशया: यानि जितना महत्व पितरों के तर्पण, मोक्ष के लिए गयाजी तीर्थ का बताया गया है, उतना ही महत्व त्रिशूल भेद का भी है। यहां पितरों का तर्पण करने से उन्हें संतुष्टि के साथ जीवन मरण को जाल से मुक्ति मिल जाती है।
कौओं का पूरे साल निवास
पं. विचित्र महाराज के अनुसार पितृपक्ष में कौओं को पितरों का दूत कहा जाता है। उन्हें भोजन आदि कराने से पितरों के आशीर्वाद की कामना की जाती है। जिनका दिखना आजकल बमुश्किल हो गया है, वहीं त्रिशूल भेद और इंद्र गयाजी तीर्थ के आसपास पूरे साल कौओं का जमावड़ा लगा रहता है। जबकि यहां बहुत कम संख्या में लोग आते हैं।
डूब जाता है हल्का कोयला
इस तीर्थ पर एक और अचंभित करने वाला दृश्य देखने मिलता है। जो लोग अपने मृत परिजनों की अस्थियां सच्चे मन से मां नर्मदा को समर्पित करते हैं, उन्हें त्रिशूल भेद में आŸचयचकित करने वाला अनोखा दृश्य देखने मिलता है। वैसे तो लकड़ी का कोयला हल्का होता है जो पानी में तैरता है, लेकिन यहां अस्थियों के साथ विसर्जित होने वाला हल्का कोयला भी मां नर्मदा के गर्भ में समा जाता है। यह कहां चला जाता है यह किसी को ज्ञात नहीं है।
Published on:
17 Sept 2022 12:56 pm
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