
amazing nagin road in MP
जबलपुर। जिले में पिछले तीन वर्षों के सडक़ हादसों के अनुसार ट्रैफिक पुलिस ने नौ ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं। ये ऐसे स्थल हैं, जहां पिछले तीन सालों में 75 लोगों की मौत हुई है। कुल हादसों की संख्या 116 है। इन सडक़ों को अब लोग मौत की सडक़ या इनमें अधिक घुमाव होने से इन्हें नागिन रोड भी कहा जाता है। जो राहगीरों को डसने से नहीं चूकती हैं। इन नागिन रोड पर चलने वाले भगवान को याद करते रहते हैं।
news fact- तीन साल में सडक़ हादसों में 75 की मौत
अब भी नौ ब्लैक स्पॉट और चरगवां मोड़ सबसे ज्यादा खतरनाक
इस दौरान 14 ब्लैक स्पॉट की खामियों को दूर कर हादसों पर अंकुश भी लगाया गया है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के निर्माण में कई ब्लैक स्पॉट स्वत: ही दूर हो गए। मौजूदा समय में सबसे खतरनाक चरगवां रोड सामने आया है। इस रोड पर पिछले डेढ़ साल में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में औसतन चार से पांच हादसे रोज होते हैं। जबकि रोज एक की मौत होती है। चरगवां के बाद सबसे खतरनाक स्थित तिलवारा पुल से चूल्हागोलाई का है। यहां पिछले तीन सालों में 15 मौतें हो चुकी हैं। जनवरी से अब तक के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 12 लोग हादसे के शिकार हो चुके हैं। शहर में गोराबाजार सबसे खतरनाक है। यहां रोज एक हादसा होता है। सबसे अधिक बाइक सवार दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।
इन ब्लैक स्पॉट की खामियां दूर
मालगोदाम- यहां रोड चौड़ीकरण और अतिक्रमण अलग कर हादसों को रोका गया।
बाबाताल- कटनी मार्ग पर 55 किमी की सडक़ खराब थी। एनएच-7 का निर्माण होने से हादसों पर रोक लग गयी।
धनगवां- कटनी रोड पर 37 किमी वाले इस स्थल पर घुमावदार मोड़ था, जो नए निर्माण में सीधा हो गया है।
सृजन चौक- एम्पायर टॉकीज से पेंटीनाका जाने वाले चालकों को दिखाई नहीं देता था। आसपास के झांड़ काट दिए गए। लेफ्ट टर्न बना दिए गए। वहीं दुर्घटना वाले बोर्ड लगा दिए गए हैं।
घमापुर चौक- संकरा चौराहा होने की वजह से दो पहिया वाहन अधिक दुर्घटनाग्रस्त होते थे। लेफ्ट टर्न फ्री और चौराहे के आसपास के अतिक्रमण हटाने से हादसों पर अंकुश लगा।
रमनपुर घाटी- सिवनी रोड पर 53 किमी इस घाटी में घुमावदार रोड था। एनएच-7 के चलते पहाड़ी काट कर सीधी रोड निकाली गई है।
महानदी मोड़- अमरकंटक रोड पर 61 किमी दूर महानदी पुल पर तीखा मोड़ है। अभी यहां दुर्घटना के बोर्ड लगाए गए हैं।
देहरीकला कुंडम रोड- कुंडम रोड पर 63 किमी माइल स्टोन के पास प्रधानमंत्री सडक़ लिंक होने से दृश्यता की कमी है। अभी चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।
गोकलपुर सामुदायिक भवन के सामने- यहां सडक़ चौड़ी कर दोनों तरफ चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
दर्शन तिराहा- खस्ताहाल सडक़ के चलते हादसे हो रहे थे। केंटोमेंट बोर्ड की तरफ से सडक़ बना दी गई है।
इंजीनियरिंग कॉलेज के सामने- यहां रोड के बीच में लोहे की जाली लगायी गई है।
प्रतापपुर- मझगवां रोड पर 20 किमी की दूर स्थित प्रतापपुर के पास रोड के बायां मोड़ पर तकनीकी खामी थी। जिसके चलते वाहन दाएं तरफ चले जाते थे और हादसा हो जाता था।
किसरौंद चौराहा- इंडियन ऑयल का डिपो और व्यतस्तम चौराहा होने की वजह से हादसे हो रहे थे। यहां के अगल-बगल के होटलों को शिफ्ट किया गया।
झांसीघाट नटवारा- जलपुर से नरसिंहपुर राजमार्ग 12 पर 34 किमी दूरी पर घुमावदार मोड़ के चलते वाहन टकरा जाते थे। इस रोड को सीधा कर और स्ट्रीट लाइट लगाकर हादसों को रोका गया।
वर्ष 2015 से 2017 तक के आंकड़ों के आधार पर नौ ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। हर साल सडक़ हादसों में मौत का आंकड़ा 350 से ऊपर पहुंच रहा है। नए ब्लैक स्पॉट की खामियां दूर करने के सुझाव सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक में दिए गए हैं।
- सुदेश सिंह, डीएसपी, ट्रैफिक
Published on:
11 Jul 2018 10:51 am
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