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‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, मेधा पाटकर नाखुश

इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध परियोजनओं की नहरों से क्षेत्र के किसानों की जमीनें खराब होने व इलाके में बीमारियां फैलने के मसले पर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस टीके कौशल की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को हाईकोर्ट में पेश कर दी।

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awkash garg

Apr 20, 2016

indira sagar dam

indira sagar dam

जबलपुर। इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध परियोजनओं की नहरों से क्षेत्र के किसानों की जमीनें खराब होने व इलाके में बीमारियां फैलने के मसले पर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस टीके कौशल की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को हाईकोर्ट में पेश कर दी। जस्टिस राजेंद्र मेनन व जस्टिस एके श्रीवास्तव की युगलपीठ ने रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता नर्मदा बचाओ आंदोलन को देने के निर्देश के साथ मामले की अगली सुनवाई तीन मई नियत की है।

यह है मामला
आंदोलन की प्रणेता मेधा पाटकर ने याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर व इंदिरा सागर परियोजनाआें की नहरों का रखरखाव सही तरीके से नहीं होने से रिसाव हो रहा है। रिसने वाला पानी क्षेत्रीय किसानों के खेतों में भर रहा है। इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

जगह-जगह पानी एकत्र होने से संक्रामक बीमारियां भी अपना असर दिखा रही हैं। हाईकोर्ट ने पूर्व सुनवाई के दौरान जस्टिस कौशल को जांच का जिम्मा सौंपा था। सोमवार को आयोग ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। कोर्ट ने रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता को सौंपने के साथ आगामी सुनवाई पर उन्हें इस सम्बंध में अपनी बात रखने को कहा।

कलेक्टर की कार्रवाई पर प्रभाव नहीं
सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं के डूब प्रभावित क्षेत्रों पर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) का क्षेत्राधिकार है। लिहाजा राज्य माइनिंग अथॉरिटी इस जमीन पर माइनिंग लीज स्वीकृत नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर के समक्ष लंबित डूब प्रभावित किसानों की शिकायतें और जस्टिस कौशल आयोग की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा उठाया जाने वाला कदम, दो अलग-अलग मुद्दे हैं। स्पष्ट किया गया कि आयोग की रिपोर्ट पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है, इससे प्रभावित हुए बिना कलेक्टर इन शिकायतों का निराकरण करें।

मेधा ने जनहित के खिलाफ बताई रिपोर्ट
पाटकर ने रिपोर्ट का सरसरी तौर पर अवलोकन करने के बाद अपनी फौरी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग की सिफारिशें सरकार के पक्ष में ज्यादा नजर आ रही हैं, प्रभावितों के पक्ष में कम। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में नुकसान की बात तो है, लेकिन इसकी भरपाई के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है।

डूब प्रभावित क्षेत्र में जलभराव से हो रही बीमारियों के बारे में भी रिपोर्ट मौन है। उन्होंने कहा कि जहां की सारी जमीन सिंचित है, उस जगह भी नहरें बना दी गई हैं। इनसे हो रहे नुकसान के सम्बंध में भी इसमें कोई चर्चा नहीं है। उन्होंने इस रिपोर्ट को जनहित के खिलाफ बताते हुए इस पर आपत्ति जताने की बात कही है।

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