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घर बैठे नशा छुड़ाने के कुछ जरूरी नुस्खे, कुछ दिनों में ही छूट जाएगी नशे की आदत

सिर्फ कीजिए एक पहल, बदल जाएगा कल, नशे की गिरफ्त में सबसे ज्यादा है युवा वर्ग

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जबलपुर. नस-नस में नशा भरकर घूमने वाले ये जानते हैं कि नशा जीवन को बर्बाद कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी वे खुद को अंधेरे के इस जाल में धकेल रहे हैं। नशे को लेकर अधिकतर लोगों की शुरुआत महज शौकिया तौर पर होती है, लेकिन बाद में यह आदत बन जाती है। इसमें जहां सबसे ज्यादा युवा वर्ग की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है, वहीं टीनेजर्स भी बदलती लाइफ स्टाइल के चक्कर में नशे की गिरफ्त में कसते जा रहे हैं। ऐसे में सिर्फ नशा छोडऩे के लिए एक पहल करने की जरूरत है, जिससे आपका कल बदल सकता है। इस नशा निवारण दिवस पर आप भी एक संकल्प लेकर खुद के जीवन को नशामुक्त बना सकते हैं।

पहल करिए, फर्क देखिए
अक्सर लोग नशा के शिकार होने के बाद इसके आदी होते ही जाते हैं। काउंसलर शिवांश द्विवेदी का कहना है कि लोगों को नशा छोडऩे के लिए पहल करने की जरूरत है, इसके बाद वे खुद अपने आप में फर्क देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि नशामुक्त जीवन जीने की आस में लोग आते हैं, लेकिन धैर्य खोकर वापस चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें और उनके परिवार को धीरज धरने की जरूरत है।

इस तरह मिलती है नशे से मुक्ति
शहर में संचालित किए जा रहे नशामुक्ति केन्द्रों में लोगों को काफी आसानी से नशे के खिलाफ जंग लड़वाई जाती है। इसकी शुरुआत सुबह के मेडिटेशन और योगा से होती है। बाद में कई मोटिवेशनल स्पीचेस दी जाती हैं, ताकि केन्द्र के लोग अवेयर हो सकें। कई उन्हें उदाहरण भी दिए जाते हैं, जिन्होंने नशे को छोड़ा है। कुछ दवाओं और थैरेपी के बाद कुछ ही दिनों में आप नशामुक्त जीवन जी सकते हैं। इसके लिए कुछ समय तक केन्द्र में ही रखा जाता है।

नशे से दूसरी दिक्कतें
- हार्ट अटैक
- डाइजेशन प्रॉब्लम
- मानसिक संतुलन गड़बड़ाना
- ब्लड प्रेशर
- किडनी प्रॉब्लम

नशे की गिरफ्त में युवा
- 14 से 17 वर्ष- 30 परसेंट
- 18 से 35 वर्ष- 55 परसेंट
- 36 से अधिक- 15 परसेंट

केस 1- विजयनगर निवासी अमित (परिवर्तित नाम) गुटखा की लत में पडऩे के कारण कॅरियर पर फोकस नहीं कर पाया। परिवार वालों से प्रेरित किया तो अमित ने भी नशा छोडऩे की इच्छा जाहिर की। नशा मुक्ति केंद्र में काउंसलर से कंसल्ट किया। कुछ समय तक एडमिट रहने के बाद अमित अब नशामुक्त जीवन जी रहा है।

केस 2- नेपियर टाउन स्थित एक हॉस्टल में रहने वाले प्रीतम (परिवर्तित नाम) को गलत दोस्तों की संगत में स्मोकिंग की लत लगा चुकी थी। तीन साल पहले उन्होंने शहर के एक प्राइवेट नशामुक्ति केन्द्र की राह चुनी। कई तरह के सेशन अटैंड किए अब प्रीतम स्मोकिंग फ्री लाइफ जी रहे हैं।