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यहां की टंकियों का निर्माण बीरबल की खिचड़ी से कम नहीं

जबलपुर में अमृत योजना में भी लापरवाही

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water tank

water tank

यहां हो रहा निर्माण
पनागर : 08
केंट : 03
पश्चिम : 02
पूर्व : 01
उत्तर : 01
बरगी : 01
केस : 1
नगर निगम प्रशासन बिलपुरा में 4.89 लाख गैलन क्षमता की पानी की टंकी का निर्माण करा रहा है। अभी तक 70 फीसदी काम हुआ है। राइजिंग लाइन से टंकी को जोड़ा नहीं गया है। 11 किमी लम्बी पाइप लाइन भी बिछाना शेष है।
केस : 2
भोंगाद्वार के पास 16 लाख लीटर क्षमता की उच्च स्तरीय पानी की टंकी का निर्माण परा हो गया है। उसे राइजिंग लाइन से जोड़ा जा रहा है, लेकिन 70 फीसदी काम हुआ है। शेष काम पूरा होने में एक माह और लगेगा।
केस-3
देवताल के पास भी करीब 20 लाख लीटर क्षमता की पानी का टंकी का निर्माण किया जा रहा है। तीन साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। टंकी को डिस्ट्रीब्यूशन और मेन लाइन से जोडऩे का काम भी अधूरा है।

जबलपुर। जलसंकट से निजात दिलाने के लिए जबलपुर शहर में अमृत योजना के तहत 150 करोड़ की लागत से 16 टंकियों का निर्माण चार साल बाद भी अधूरा है। जिन क्षेत्रों में टंकियां बन गई हैं, उन्हें अभी तक डिस्ट्रीब्यूशन लाइन और मेन राइजिंग लाइन से नहीं जोड़ा जा सका है। इससे सम्बंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में इस साल भी गर्मी में शहर को जलसंकट से जूझना पड़ सकता है। जानकारों के अनुसार अमृत योजना के तहत पानी की टंकियों का निमार्ण चार साल से हो रहा है। निर्माण कार्य वर्ष 2018 में पूरा होना था। लेकिन, अभी तक शत-प्रतिशत काम नहीं हुआ है। नया गांव, भोगाद्वार, कुंगवा, तिलहरी में टंकियों का निर्माण पूरा हो गया है, लेकिन उन्हें रमनगरा प्लांट से नहीं जोड़ा जा सका है। प्लांट से 30 एमएलडी पानी की सप्लाई होगी। इसी तरह अन्य टंकियों को जलसंयत्र से जोड़ा जाना है।
पाइप लाइन भी अधूरी
16 टंकियों से जलापूर्ति के लिए 450 किमी लम्बी पाइप लाइन बिछाई जाना है। इसमें से करीब 350 किमी में पाइप लाइन डाली जा सकी है। करीब 150 किमी पाइप लाइन डालना शेष है। जानकारों के अनुसार लाइनों को जोडऩे में करीब तीन-चार माह लगेंगे। नगर निगम योजना प्रभारी नवीन रिछारिया ने कहा कि अधिकांश टंकियों का निर्माण पूरा हो गया है। लेकिन, उन्हें राइजिंग लाइन से जोड़ा नहीं जा सका है। मई से पहले कुछ टंकियों को मेन लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन से जोड़ दिया जाएगा, जिससे सम्बंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति शुरू हो सके।