
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की न्यूरोलॉजी टीम ने रच दिया इतिहास
जबलपुर. NCB Medical college के न्यूरो सर्जन डा. विजय परिहार और उनकी टीम ने बड़ी सफलता दर्ज करते हुए इतिहास रच दिया है। इस टीम ने आठ घंटे के ऑपरेशन में मस्तिष्क में खून के संचार के लिए नया रास्ता तैयार कर मरीज की जान बचाई। डॉक्टरों के अनुसार ये मध्य प्रदेश के लिए अब तक का सबसे बड़ा, कठिन और सफल न्यूरो ऑपरेशन है।
इस ऐतिहासिक सफलता के बारे में न्यूरो सर्जन डा. विजय परिहार का कहना है कि सामान्य तौर पर हर्ट की बाइपास सर्जरी में इस्तेमाल की जाने वाली पैरों की नस जिसे ग्रेट सेफनस वेन कहते हैं को निकाल कर मरीज की गर्दन के बाईं ओर की बड़ी नस (इक्सटर्नल करोटिड धमनी) से लेकर दिमाग की नस (मिडल सेरब्रल धमनी) तक आधुनिक माइक्रोस्कोप की मदद से जोड़ा गया। इसे हाइफ्लो ईसीआइसी बाइपास आपरेशन कहा जाता है। साथ-साथ मरीज के दिमाग की खून की नस के बड़े गुब्बारे (ज्वाइंट एन्यरिजम) को बंद किया गया। इसके बाद अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप की सुविधा से आपरेशन टेबल पर ही मरीज की दोबारा एंजियोग्राफी कर बनाए गए नए रास्ते में खून प्रवाह सुनिश्चित किया गया।
इस तरह सूबे के इस पहले ब्रेन बाइपास आपरेशन के जरिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरो सर्जन ने बड़ा मुकाम हासिल किया। यह आपरेशन करीब आठ घंटे तक चला। वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ वाईआर यादव की अगुवाई में न्यूरो सर्जन, इंटर्वेंशन न्यूरो विज्ञान व न्यूरो निश्चेतना विशेषज्ञों की टीम ने ईसीआइसी हाईफ्लो बाइपास का सफल आपरेशन कर मरीज की जान बचाई।
न्यूरो सर्जन डॉ यादव का कहना है कि इस तरह के आपरेशन दिल्ली एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में ही संभव होते हैं। मध्य प्रदेश में सम्भवतः यह पहला आपरेशन है। आपरेशन आयुष्मान योजना के तहत पूर्णतः निश्शुल्क किया गया है। इस सफल ऑपरेशन के बाद मरीज के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।
इस ऑपरेशन में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. प्रदीप कसार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. जितेंद्र गुप्ता, न्यूरो सर्जरी टीम, इंटर्वेन्शन न्यूरोविज्ञान, न्यूरोनिश्चेतना व वैस्क्युलर सर्जरी टीम का सहयोग रहा।
डॉक्टरों के अनुसार ग्वालियर निवासी 36 वर्षीय महिला को सिर दर्द व ब्रेन हेमरेज होने पर परिजनों ने पहले स्थानीय चिकित्सकों से परामर्श लिया था। सीटी स्कैन में मस्तिष्क के बाईं तरफ की मुख्य नस (इंटरनल करोटिड धमनी) में एक बड़ा गुब्बारानुमा ज्वाइंट ऐन्यरिजम पाया गया, जिसके फटने से मरीज को जान का खतरा था। ऐसे में ग्वालियर के डॉक्टरों ने मरीज को दिल्ली एम्स ले जाने की सलाह दी। लेकिन परिजन दिल्ली जाने में असमर्थ थे। लिहाजा वो मरीज को लेकर जबलपुर मेडिकल कॉलेज क सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आए। यहां डॉ. यादव ने मरीज की जांच कर ब्रेन एंजियोग्राफी कराई जिसमें ज्वाइंट ऐन्यरिजम की पुष्टि हुई। उसके बाद ये बड़ा ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया।
Published on:
11 Oct 2021 05:29 pm
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