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‘सत्ता की शक्ति’ का नया केन्द्र हमारा शक्ति भवन

कैबिनेट बैठक होने से सुर्खियों में आया 30 साल पहले बना विद्युत मंडल का मुख्यालय, आगे भी कई सम्भावनाएं

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New centre of powerr Our Shakti Bhawan

New centre of powerr Our Shakti Bhawan

जबलपुर . 30 साल पहले विद्युत मंडल के मुख्यालय के रूप में शक्ति भवन बनाया गया था। कांग्रेस वापस सत्ता में लौटी, तो शक्तिभवन एक बार फिर सत्ता की शक्ति के संचार का केन्द्र बन गया। हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक ने इस ओर इशारा किया है कि शक्तिभवन से विद्युत के संचार के साथ ही सत्ता भी संचालित की जाएगी। अपने आप में अनेक खूबियों वाले इस भवन की खास बात यह भी है कि यह प्रकृति की धरोहर से छेड़छाड़ किए बगैर बनाया गया है।

चाचा ने उद्घाटन कराया, भतीजा कैबिनेट में शामिल
24 मई 1989 को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री वसंत साठे, प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल बोरा और तत्कालीन राज्यमंत्री चन्द्रकुमार भनोत ने इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद यहां से सिर्फ बिजली संबंधी बैठकें और कार्य संचालित किए गए। तीस साल बाद हाल ही में प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में वित्त मंत्री तरुण भनोत शामिल हुए। वे चन्द्रकुमार भनोत के भतीजे हैं।

यह है स्थिति
18 दिसंबर 1981 को आधारशिला रखी गई
07 साल लगे निर्माण में
43,500 वर्गमीटर में भवन का निर्माण
19 अगस्त 1989 को शक्ति भवन अस्तित्व में आया
तारापुर एंड कंपनी के दोशी एंड भल्ला आर्किटेक्ट ने किया डिजाइन
निचले हिस्से में बेसमेंट
ऊपर के हिस्से में इमारत
2002 में विद्युत मंडल कंपनियों में बंट गया।

बिना सीढ़ी चढ़े तीसरी मंजिल
बड़े ही नायाब अंदाज में डिजाइन की गई इस इमारत की खास बात यह है कि पहले ब्लॉक में प्रवेश करने के बाद बिना सीढ़ी चढ़े सीधे तीसरी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। इसके पीछे का कारण इमारत का पहाड़ी पर बना होना है। पत्थरों और पेड़ पौधों को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना इसका निर्माण किया गया है। हर एक ब्लॉक एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। शक्तिभवन की खासियत है कि यहां का कोई भी कमरा ऐसा नहीं है, जहां प्रकृति का प्रकाश न पहुंचता हो, इसके साथ ही यह पूरी तरह से एयरकूल्ड है। इसी खासियत की वजह से शक्ति भवन को एशिया की बेस्ट इमारत से भी नवाजा जा चुका है।