कई किलोमीटर दूर हो गए थाने
जबलपुर। शहर में प्रशासनिक दृष्टिकोण और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर थानों को मिलाकर सम्भाग बनाया गया है। नए सम्भाग बनाने में शामिल थानों की व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर पुलिस महकमे में ही बहस छिड़ गई है। गढ़ा सर्किल में माढ़ोताल, विजय नगर थाने को शामिल करने और इसी रूट पर पडऩे वाले संजीवनी नगर थाने को छोडऩे पर सवाल उठ रहे हैं। अफसरों का कहना है, संजीवनी नगर थाने की सीमा माढ़ोताल और विजय नगर से पास पड़ती है। गढ़ा के बजाय तीनों नए थानों को मिलाकर सर्किल बनाया जाता, तो अपराधों पर प्रभावी रोकथाम हो सकती थी।
इस तरह बनाए सर्किल
जानकारी के अुनसार अभी तक गढ़ा थाना गोरखपुर सर्किल, विजय नगर गोहलपुर और माढ़ोताल अधारताल सर्किल के हिस्से थे। अब इन तीनों थानों को मिलाकर नया सर्किल बनाया गया है। इसकी कमान प्रशिक्षु आइपीएस हंसराज सिंह को सौंपी गई है। नए सर्किल में संजीवनी नगर के बजाय बजाय गढ़ा थाने को शामिल किया गया है। गढ़ा थाने की सीमा तिलवारा, संजीवनी नगर, मदन महल और गोरखपुर थाने से लगती है। इसके बाद गोरखपुर थाने के सर्किल में शामिल संजीवनी नगर थाना क्षेत्र की सीमा शुरू होगी। इसके बाद गढ़ा सर्किल की माढ़ोताल व विजय नगर थाने की सीमा आएगी।
कुंडम को लेकर बदला निर्णय
इससे पूर्व ग्रामीण क्षेत्र के कुंडम अनुभाग को लेकर भी मामले ने तूल पकड़ा था। तब कुंडम के साथ सिहोरा अनुभाग के मझगवां थाने को शामिल किया गया था। सिहोरा से मझगवां थाने की दूरी 14 किमी और कुंडम की दूरी 45 किमी होने से विवाद होने पर एसपी को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा।
अपराधों के आंकड़ों के अनुसार निर्णय
एसपी अमित सिंह का कहना है, अपराध के आंकड़ों के आधार पर गढ़ा सर्किल का गठन किया गया है। विजय नगर और माढ़ोताल चौकी से थाने बने हैं। इन दोनों थानों में सालभर में पांच सौ से छह सौ मामले दर्ज होते हैं, जबकि गढ़ा थाने में लगभग 1500 मामले दर्ज होते हैं। हर सीएसपी को दो हजार प्रकरणों की मॉनीटरिंग मिले, इस हिसाब से सर्किल का गठन किया गया है।
थानों में इस तरह पहुंचती हैं शिकायतें
नवगठित गढ़ा सम्भाग
गढ़ा 1600 लगभग
विजय नगर 300
दोबारा गठित अधारताल सम्भाग
अधारताल 1200
पनागर 1000
दोबारा गठित गोरखपुर सम्भाग
संजीवनी नगर 500
गोरखपुर 1600
माढ़ोताल 350
दोबारा गठित गोहलपुर सम्भाग
गोहलपुर 1200
हनुमानताल 1000