
Alcohol abuse came to the public in the university
जबलपुर। विश्वविद्यालयों में लम्बे समय नियम विरुद्ध पदस्थ राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम समन्वयकों को हटाने की तैयारी उच्च शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। विभाग के पास पहुंची शिकायतों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय सहित, देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय, जीवाजी विश्वविद्यालय व अन्य विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय समन्वयक के पदों पर 3 से लेकर 7 साल से अधिकारी पदस्थ थे। उच्च शिक्षा विभाग ने नई पदस्थापना के आदेश दिए हैं। रादुविवि को भी अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।
शासन से होती है नियुक्ति
विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम समन्वयकों की स्थायी नियुक्ति शासन करता है। यह नियुक्ति 3 साल के लिए होती है। रादुविवि में एनएसएस प्रभारी के रूप में 8 साल से पदस्थ हैं।
प्राध्यापक, प्राचार्य, रीडर भी कर सकेंगे आवेदन- उच्च शिक्षा विभाग ने नियुक्ति के नियम तय कर दिए हैं। राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम समन्वयक बनने के लिए विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों के रीडर, प्राचार्य, सीनियर लेक्चरर, प्राध्यापक, एसोसिएट प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक भी आवेदन कर सकेंगे।
कुलपति, प्राचार्य की अनुशंसा जरूरी
आवेदन के लिए प्राचार्य की अनुशंसा आवश्यक होगी। कुलपति की अनुशंसा को भी अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश के सभी सात विश्वविद्यालयों में यह नियुक्ति की प्रक्रिया की जाएगी। आवेदन बीस दिन में विभाग को भेजने होंगे।
यह तय किए नियम
कार्यक्रम अधिकारी के तौर पर 3 वर्ष का अनुभव
चयन के समय 50 वर्ष से अधिक आयु नहीं होनी चाहिए
महाविद्यालय में एनएसएस का वांछित कार्य अनुभव
ट्रेनिंग ओरिएंटेशन सेंटर या ईटीआई में प्रशिक्षित होना जरूरी
उच्च शिक्षा विभाग ने रासेयो कार्यक्रम समन्वयक के लिए नए सिरे से पदस्थापना की कार्रवाई शुरू की है। इस सम्बंध में विवि से सम्बद्ध सभी महाविद्यालयों को सूचित कर दिया गया है। योग्य उम्मीदवारों से आवेदन करने के लिए कहा गया है।
-प्रो. कमलेश मिश्रा, कुलसचिव, रादुविवि
Published on:
04 Aug 2019 09:00 am
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