27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

#BurnUnit जबलपुर में बर्न यूनिट नहीं, मेडिकल और जिला अस्पताल में सामान्य वार्ड में हो रहा उपचार

#BurnUnit जबलपुर में बर्न यूनिट नहीं, मेडिकल और जिला अस्पताल में सामान्य वार्ड में हो रहा उपचार  

2 min read
Google source verification
burn unit in Jabalpur

burn unit in Jabalpur

जबलपुर . प्रदेश के 16 जिलों का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल होने के बावजूद मेडिकल अस्पताल में स्पेशलाइज्ड बर्न यूनिट नहीं है। जबलपुर में सरकारी और निजी अस्पतालों की बर्न के मरीजों के इलाज के मामले में एक जैसी स्थिति है। यूनिट नहीं होने से अस्पतालों में मरीजों को सर्जरी वार्ड में ही अलग से सेक्शन बनाकर रखना पड़ता है।

सालाना साढ़े तीन सौ केस

हाल ही में मेडिकल अस्पताल में बर्न का एक वार्ड बनाया गया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। मेडिकल अस्पताल में सालाना औसतन साढ़े तीन सौ के लगभग बर्न केस आते हैं। इन मरीजों को बहुत कष्टपूर्ण हालात में उपचार कराना पड़ता है। इसी तरह से जिला अस्पताल में भी बर्न का एक वार्ड है।

ये सेटअप जरूरी

बर्न यूनिट को इस तरह से तैयार किया जाता है जिससे की यूनिट में भर्ती मरीज को किसी प्रकार का संक्रमण न हो। मरीज के झुलसने के बाद उसके शरीर से त्वचा की परत उतर जाने से सारे कीटाणु सीधे उसके शरीर में प्रवेश करते हैं। इसलिए अगर थोड़ी भी धूल मिटटी उसके झुलसे हिस्से पर पड़ती है तो उसके जीवन को खतरा बन जाता है। ऐसे में वार्ड इस तरह बनाए जाते हैं कि उनमें संक्रमण का खतरा नहीं रहे। वार्ड में ऐसी मशीनें लगाई जाती हैं जो यूनिट में मौजूद जीवाणु, विषाणु और फंगस को नष्ट कर देती हैं। इस तरह की यूनिट विकसित करने में न्यूनतम 1 करोड़ रुपये के लगभग का खर्च आता है। मेडिकल अस्पताल में स्किन बैंक शुरू किया गया है। बोन बैंक भी शुरू होने वाला है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ठोस प्रयास हों तो यहां भी स्पेशलाइज्ड बर्न यूनिट स्थापित की जा सकती है।

लंबा चलता है इलाज

डॉक्टरों के अनुसार बर्न केसेज में मरीज का इलाज लंबा चलता है। ऐसे में बर्न यूनिट को क्रिटिकल केयर यूनिट के रूप में विकसित किया जाता है। जिसमें वेंटीलेटर, स्किन ग्राफ्टिंग के लिए उपकरण, ड्रेसर, ओटी, आईसीयू, एसी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अलग-अलग विधाओं के 5-6 चिकित्सकों की टीम होती है। इनमें प्लास्टिक सर्जन से लेकर मेडिसिन विशेषज्ञ और न्यूट्रीशियन होते हैं। मरीज को ठीक होने में लंबा समय लगता है।

मेडिकल अस्पताल के पास तीन प्लास्टिक सर्जन हैं, हाल ही में एक बर्न वार्ड भी बनाया गया है। सर्जरी विभाग के अंतर्गत यहां बर्न के मरीजों का इलाज किया जाता है। बर्न के लिए सुविधाओं का और विस्तार हो प्रयास करेंगे।
- डॉ.अरविंद शर्मा, अधीक्षक, मेडिकल अस्पताल