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डॉक्टर लिखने का अधिकार नहीं और मरीज को दे दिया अनफिट प्रमाण पत्र

योग्यता इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का और लिख रहा था प्रतिबंधित श्रेणी की एलोपैथी दवाएं  

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चिकित्सकों, नर्सों व पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग

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जबलपुर। योग्यता इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की और मरीजों को प्रतिबंधित श्रेणी की एलोपैथी दवाएं लिख रहे थे। यहां तक कि बिना अधिकार के नाम के आगे डॉक्टर भी लिख रखा है। कोरोना संक्रमण के बीच भी बुखार से पीडि़त लोगों का इलाज कर रहा था। यहीं नहीं खुद को डॉक्टर बता कर उसने एक मरीज को अनफिट प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया। सीएमएचओ के निर्देश पर झोलाझाप डॉक्टरों के खिलाफ गठित कमेटी ने गोपनीय तौर पर 13 अप्रैल को उसके क्लीनिक पर पहुंच कर जांच की। इसके बाद शनिवार को कमेटी ने सीएमएचओ के निर्देश पर गोरखपुर थाने में धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई।
गोरखपुर थाना प्रभारी उमेश तिवारी ने बताया कि दुर्गानगर चौक रामपुर में महेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा पाण्डे दवाखाना नाम से चिकित्सा व्यवसाय किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. मनीष मिश्रा के निर्देश पर गठित चिकित्सा दल ने जब क्लीनिक की जांच की तो महेन्द्र कुमार एलापैथी पद्धति से मरीज का उपचार करते मिले। दस्तावेजों की जांच पर पता चला कि पाण्डेय के पास इलेक्ट्रोहोम्योपैथी पद्धति का पंजीयन है, लेकिन वे एलोपैथी समेत अन्य पद्धति से चिकित्सा व्यवसाय नहीं कर सकते।
मरीज के परचे पर प्रतिबंधित दवा—
थाना प्रभारी ने बताया कि सीएमएचओ द्वारा गठित टीम के सदस्य डॉ. राधावल्लभ चौधरी, डॉ. धीरज दवंडे व मीडिया अधिकारी अजय कुरील ने जांच रिपोर्ट देते हुए बताया है कि महेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बीके जैन नामक मरीज के परचे पर प्रतिबंधित श्रेणी यानि एच शेड्यूल की 4 किस्म की दवाएं लिखी थीं। मरीज को अनफिट प्रमाण पत्र भी जारी किया था। कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान झोलाछाप द्वारा सर्दी जुकाम व बुखार के लक्षण वाले मरीजों का उपचार लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।
इन धाराओं के उल्लंघन में प्रकरण दर्ज
टीआई के मुताबिक आरोपी महेंद्र कुमार पांडे के खिलाफ बिना पंजीयन के एलोपैथी प्रेक्टिस करने और मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने पर नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 की धारा 34, डॉक्टर उपाधि का प्रयोग करने पर चिकित्सा शिक्षा संस्था नियंत्रण अधिनियम 1973 की धारा 7 (ग) और अनाधिकृत चिकित्सा व्यवसाय कर मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 21 सहपठित् धारा 24, क्लीनिकल स्थापना का पंजीयन न होने पर मप्र उपचर्यागृह तथा रुजोपचार सम्बंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 की धारा 3 का उल्लंघन करते हुए धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है।