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अब नहाने और पीने से पहले देखें कितना सुद्धा है नर्मदा जल

अब नहाने और पीने से पहले देखें कितना सुद्धा है नर्मदा जल  

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gwarighat

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जबलपुर. नर्मदा जल की शुद्धत्ता का अब रियल टाइम डेटा मिलेगा। इसके लिए ग्वारीघाट स्थित नाव घाट पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक स्क्रीन लगाई है, जिसमें नदी की डाउन स्ट्रीम में स्थापित फ्लोटिंग स्टेशन के मध्यम से डेटा प्रदर्शित होता रहेगा।

शुद्धता का मिलेगा रियल टाइम डाटा
एनजीटी में पेश की थी रिपोर्ट

मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार फ्लोटिंग स्टेशन का ट्रॉयल पूरा हो चुका है। इसे वर्तमान में नदी के जल स्तर को देखते हुए बाहर निकाल लिया गया था, जिसे जल्द ही पुन: स्थापित कर दिया जाएगा, इसके साथ ही सेंसर के माध्यम से जल गुणवत्ता लोगों को पता चलने लगी।

वर्ष 2021 में एनजीटी में दायर एक जनहित याचिका में सुनवाई के दौरान रिपोर्ट पेश की गई थी कि जबलपुर में नर्मदा में 136 एमएलडी सीवरेज की गंदगी मिल रही है। इसके कारण कई घाटों के आसपास जल प्रदूषण बहुत ज्यादा है। ऐसे में लगातार मांग उठ रही थी की नगर के प्रमुख तट की डाउन स्ट्रीम में रियल टाइम मानीटरिंग सिस्टम स्थापित किया जाए, जिससे की जल गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति पता लगती रहे और उसे सुधारने की दिशा में काम किया जा सके। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 40 लाख की लागत से रियल टाइम मानीटरिंग सिस्टम स्थापित किया है। जिसका सेंसर घाट से दो सौ मीटर की दूरी पर स्थापित है। जिन मानकों पर नर्मदा जल की गुणवत्ता का डेटा सामने आएगा उनमें रंग, टर्बिडिटी एनटीयू, कुल घुलित ठोस, पीएच, क्षारीयता, कुल कठोरता, कैल्श्यिम, मैग्नीशियम, आयरन, मैग्नीज, क्लोराइड, फ्लोराइड, नाइट्रेट, सेलेनियम, पारा, आर्सेनिक, लेड, जिंक। इसके साथ ही नदी में मौजूद बायो कैमिकल ऑक्सीजन डिमांड, डिजाल्व ऑक्सीजन शामिल हैं।

नर्मदा तट ग्वारीघाट की डाउन स्ट्रीम में फ्लोटिंग स्टेशन स्थापित करने का ट्रायल पूरा हो चुका है। बरगी डैम से पानी छोडे़ जाने के कारण नदी में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए इसे निकाल लिया गया था। अब जल्दी ही फिर से स्थापित किया जाएगा, इसके साथ ही दो सौ मीटर की दूरी पर सेंसर के माध्यम से डिस्प्ले बोर्ड पर जल गुणवत्ता का रियल टाइम डेटा प्रदर्शित होने लगेगा।
- आलोक कुमार जैन, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड