
NRI quota resulted become bone in throat
जबलपुर. एमबीबीएस में एनआरआई कोटे का प्रवेश मेडिकल कॉलेजों की गले की हड्डी बन गई है। मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर ने शपथ पत्र के आधार पर सत्र 2016-17 के परिणाम जारी कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एनआरआई कोटे के अन्तर्गत गलत प्रक्रिया से प्रवेश लेने वाले 107 मेडिकल छात्र-छात्राओं को अवैध घोषित कर दिया है। मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर ने सत्र 2016-17 के नामांकन प्रक्रिया की जांच में 172 छात्र-छात्राओं के दस्तावेज अपूर्ण पाए थे। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने पहले इनके परिणाम जारी नहीं किए थे। कार्य परिषद की बैठक के निर्णय के बाद शपथ पत्र के आधार पर 162 छात्र-छात्राओं परिणाम जारी कर दिया। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सत्र 2014-15 के बाद सभी सत्रों के रिकॉर्ड तलब किया है। मेडिकल कॉलेजों में चर्चा है कि जिन आधारों पर वर्तमान सत्र के प्रवेश निरस्त हुए, उन आधार पर जांच होगी तो पूर्व के वर्षों में हुए प्रवेश भी अवैध घोषित होंगे। पिछले तीन वर्षों में एमबीबीएस में 265 छात्र-छात्राओं ने एनआरआई कोटे में प्रवेश लिया है।
ऐसा है शपथ पत्र
छात्र-छात्राओं के शपथ पत्र पर उनके डीन ने हस्ताक्षर किया है कि छात्र-छात्रा का प्रवेश पूर्ण रूप से वैध है। परीक्षा परिणाम घोषित होने से प्रवेश की वैधता प्रमाणित नहीं होगी। भविष्य में डीएमई, एमसीआई, नेशनल मेडिकल कमीशन, कोर्ट द्वारा प्रवेश अवैध घोषित होता है तो प्रवेश देने वाली संस्था या छात्र-छात्राएं जिम्मेदार होंगे। फर्जी प्रवेश का यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट में चल रहा है, इसलिए अब तक किसी भी निजी कॉलेज ने अपनी सीटें सरेंडर नहीं की। डीएमई का कहना है कि वो १०७ सीटों के दाखिलों को अयोग्य घोषित कर चुके हैं, लेकिन कॉलेजों ने अब तक सीटों की जानकारी नहीं दी।
मेडिकल यूनिवर्सिटी ने शपथ पत्र के आधार पर छात्र हित में एमबीबीएस के एनआरआई कोटे का परिणाम जारी किया है। जांच में कोई सक्षम संस्था उनका प्रवेश निरस्त करती है तो प्रवेश देने वाली संस्था या छात्र-छात्राएं जिम्मेदार होंगे।
डॉ.आरएस शर्मा, कुलपति, मेडिकल यूनिवर्सिटी
Published on:
31 Jan 2018 06:00 am
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