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प्याज फिर रुलाने लगी, दाल के नाम से लग रहा करंट

महंगाई से परेशान जबलपुर के शहरी

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Even after the arrival of new onions, sharp stains are visible

कृषि उपज मंडी में प्याज।

जबलपुर। कोई कारण नहीं दिख रहा है। लेकिन, मप्र के लगभग सभी शहरों में प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं। साथ में दाल में महंगाई का तड़का लगने से खरीदारों को करंट लग रहा है। जबलपुर में तो लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि कुछ दिन रुक जाओ। उसके बाद ही प्याज का तड़का लगाएंगे। दुकानदारों का कहना है कि उनके पास माल कम पहुंच रहा है। जबकि, आस-पास के किसानों को आरोप है कि उनसे तो प्याज सस्ता खरीदा जाता है। बाद में जमाखोरी करके महंगाई बढ़ा दी जाती हैद्ध
जबलपुर शहर के लोगों ने कहा कि महंगाई की मार कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्याज तो लोगों को रुला ही रही है, अब दाल भी रसोईघर का बजट बिगाडऩे तुली है। इससे आम आदमी की थाली का स्वाद फीका होने लगा है। जमाखोरों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से भी व्यापारी शादी-विवाह के सीजन में महंगे दामों पर ये सामग्री बेच रहे हैं। बीते एक से दो माह में दालों में करीब 20 से 25 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। प्याज के दाम पर ग्रेड के अनुसार 30 से लेकर 100 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं।
जानकारों के अनुसार उड़द दाल में दो माह के दौरान तेजी आई है तो वहीं तुअर दाल नीचे आ गई है। उड़द दाल में 2500 रुपए प्रति क्विंट की तेजी आई है। करीब 25 रुपए किलो तक दाल में इजाफा हुआ है। धुली दाल 80 से 90 रुपए किलो है। बिना धुली अच्छी दाल 75 से 85 रुपए तक है। वहीं 15 सौ रुपए किलो तक बढ़ चुकी तुअर दाल 500 रुपए कम हो गई है। अच्छी क्वालिटी की तुअर दाल 70 से 85 रुपए किलो तक है। इसी तरह मूंग दाल में 1000 रुपए की तेजी आई है। धुली दाल 72 से 84 एवं बिना धुली 62 से 70 रुपए तक बिक रही है।
अलग अलग रेट
प्याज के रेट भी ग्रेड के अनुसार हैं। छोटी प्याज 30 रुपए किलो से ए गे्रड प्याज 90 से 100 रुपए तक पहुंच गई है। लोकल आवक कम एवं शादी विवाह के चलते डिमांड बढऩे के कारण प्याज के दामों में इजाफा हुआ है। जल्द ही नई प्याज की आवक होने से प्याज के दामों में कमी आने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। व्यापारी दामों में हुए इजाफे की वजह बरसात को बता रहे हैं। इस बार ज्यादा बारिश होने के कारण खेतों में पानी भरा और इससे उड़द की फसल को नुकसान पहुंचा है। उत्पादन कम होने के कारण दालें कुछ महंगी हुई हैं। खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले कम होने के कारण उत्पादन में कमी आई है।