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ढाई साल की बच्ची को मिली नई जिंदगी, मासूम के दिल में लगाया पेसमेकर

ढाई साल की बच्ची को मिली नई जिंदगी, मासूम के दिल में लगाया पेसमेकर

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जबलपुर. शहर के तीन युवा डॉक्टरों ने ढाई साल की बच्ची के दिल के अंदर पेसमेकर लगाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। दीक्षितपुरा स्थित सेठ मन्नूलाल जगन्नाथदास ट्रस्ट अस्पताल में सोमवार को बच्ची के दिल में पेसमेकर लगाया गया। बच्ची स्वस्थ्य है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके तिवारी ने दावा किया कि मप्र में पहली बार इतनी कम उम्र के बच्चे को पेसमेकर लगाया गया।

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इंटरवेंशनल एवं पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केएल उमामहेश्वर, न्यूरो सर्जन डॉ. यतिन खेर और एनेस्थेटिस्ट डॉ.आर मिश्रा की टीम ने ये जटिल ऑपरेशन किया। डॉ. तिवारी ने बताया कि ऐसा 22 हजार बच्चों में किसी एक को इस तरह की समस्या होती है। ढाई साल की वंशिका खत्री के पिता को इस बीमारी के बारे में 2 महीने पहले जानकारी हुई। पॉपकॉर्न बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। इलाज का खर्च अधिक होने के कारण वे चिंतित थे। डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को महज 30 हजार के खर्च में पेसमकेर लगाया।

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ये किया प्रयोग
ढाई साल की बच्ची का ह्रदय आकर में छोटा होता है, जिससे पेस-मेकर दिल के ऊपर लगाया जाता है। इसमें हार्ट-रेट बनाये रखने के लिए पेसमेकर को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। जिसकी वजह से मरीज को हर तीन-चार साल में नई बैटरी डलवानी पड़ती है। डॉक्टरों की टीम ने बच्ची के दिल के अंदर पेस मेकर लगाने का निर्णय लिया। इसमें फिर मरीज को कोई ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती और बैटरी 10 वर्ष तक चलती है। इसके लिए बच्ची की कॉर्ड में एक लूप छोड़ा है, जिससे उम्र के साथ हृदय विकसित होने पर भी कॉर्ड नहीं टूटेगा। अभी सामान्य तौर पर 20 या इससे अधिक वर्ष के लोगों का ही इस तरह का ऑपरेशन कर पेसमेकर लगाया जाता है।