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जबलपुर. ज्योतिष में कुंडली में नवग्रहों की स्थिति के अनुसार ही जीवन के सुख-दुखों के बारे में बताया जाता है। नवग्रहों में यूं तो सभी ग्रहों का अपना-अपना महत्व है पर इनमें भी शुक्र देव का स्थान सबसे अहम है। पंडित जर्नादन शुक्ला के अनुसार शुक्रदेव को सभी भौतिक सुखों, प्रेम, यौन सुख आदि का कारक माना जाता है। जमीन और वाहन का भी इन्हें कारक माना जाता है।
शुक्र बेहद चमकीले ग्रह हैं और आसमान में सुबह व शाम को अलग ही नजर आते हैं। जीवन के सभी भौतिक सुख और विशेष रूप से यौन सुख शुक्र के अधीन हैं। कुंडली में शुक्रके निर्बल होने से जीवन में स्त्री सुख- भोग विलास की कमी रहती है. इसके साथ ही जननेद्रिय संबंधी परेशानियाँ हो सकती है. इसके विपरीत शुक्र बलवान हो तो जीवन स्वर्ग का सा हो जाता है। शुक्रदेव राक्षसों के गुरु हैं और अपनी मृत संजीवनी विद्या के बल पर वे मृत दानवों को भी पुनर्जीवित कर दिया करते थे।
पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि कुंडली में शुक्र अशुभ स्थान पर हो, अकारक हो, अस्त हो या नीच का हो तो अच्छा फल नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में शुक्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए उपाय करने चाहिए। लक्ष्मीपूजन से शुक्रदेव प्रसन्न होते हैं। शुक्रदेव के मंत्र जाप भी अच्छा फल देते हैं। शुक्ल पक्ष के किसी भी शुक्रवार से शुक्रदेव के किसी एक मंत्र का जाप शुरु करना चाहिए. सूर्योदय काल में रोज शुक्र के मंत्र का जाप करना चाहिए. नियमित रूप से लगातार 40 दिनों तक शुक्र के 16 हजार मंत्र जाप पूरे करें. इसके बाद शुक्रदेव की प्रसन्नता से आपके जीवन में भौतिक सुखों की कमी खत्म होने लगेगी। शुक्रदेव का मंत्र कम से एक माला रोज पढ़ें तो जीवनभर पैसों और सुखों की कमी नहीं रहेगी।
शुक्र का नाम मंत्र - ऊँ शुं शुक्राय नम:
शुक्र तांत्रोक्त मंत्र - ऊँ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:
शुक्र का पौराणिक मंत्र - ऊँ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम ।
Published on:
05 Oct 2018 09:43 am

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