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विधि-नायक भगवान की प्रतिमा और मंगल-कलश आए

पंचकल्याणक-गजरथ महोत्सव की तैयारियां जोरों पर: सकल जैन समाज के लोगों में महोत्सव में शामिल होने के लिए उत्साह

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gajrath mahotsav

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जबलपुर। मेडिकल कॉलेज के समीप बनायी गई अयोध्या नगरी में 17 फरवरी से होने वाले मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा-गजरथ महोत्सव की तैयारियां चरम पर हैं। महोत्सव के लिए बुधवार को विधि-नायक भगवान की सवा नौ इंच की प्रतिमा श्रीवर्णी गुरुकुल पहुंच गई। इसी के साथ जयपुर राजस्थान से कलश और मंगल-कलश भी जबलपुर आ चुके हैं। इन्हें गुरुकुल परिसर में नवनिर्मित भव्य श्री दिगम्बर जैन मंदिर के शिखर पर सुशोभित किया जाएगा।
गुरुकुल के ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा ने बताया कि पाण्डुक-शिला का निर्माण कार्य गुरुवार तक पूरा हो जाएगा। इसी पर विधि-नायक भगवान की पूजा-अर्चना-अभिषेक का विधान सम्पन्न होगा। अभिषेक के चरणों में चरणाभिषेक, मस्काभिषेक, पंचामृत अभिषेक, प्रक्षालन, शांतिधारा, जन्माभिषेक, वेश-भूषा महत्वपूर्ण हैं। पांडक शिला पर इंद्र व देवगण प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का अभिषेक करेंगे। गजरथ महोत्सव के निर्देशाचार्य बाल ब्रह्मचारी जिनेश भैया और प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया बंडा व नरेश भैया की निगरानी में तैयारियां की जा रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष अशोक जैन ने बताया, सभी समितियों के प्रमुख एवं सदस्य सक्रिय हैं।
महोत्सव की उमंग
गुरुकुल के ब्रह्मचारी त्रिलोक भैया ने बताया कि जिन पात्रों का मंगलवार को चरहाई स्थित आचार्य विद्यासागर भवन में चयन किया गया, उन्हें जबलपुर और आसपास सहित देशभर के जैन परिवारों से बधाइयां मिल रही हैं। जिस तरह सूर्योदय से पूर्व क्षितिज पर लालिमा छा जाती है, ठीक वैसा ही मनोहारी वातावरण गजरथ से पूर्व देखने को मिल रहा है। चारों ओर उत्साह, उमंग, उल्लास, आनंद की वृष्टि हो रही है। जैसे किसी को झरने की तलाश हो और उसे झरना मिला न हो लेकिन पक्षियों की चहचहाहट इस बात की सूचना दे रही हो कि आगे कहीं झरना है, ठीक वैसे ही गजरथ से पहले सभी को भगवान के दर्शन होने की उत्कंठा और प्यास जाग गई है। जिज्ञासा के बीच तैयारियां सोत्साह जारी हैं। हर कोई अपने दायित्व के हिसाब से पूरी तन्मयता के साथ जुटा हुआ है।
कनाडा के आर्किटेक्ट
आचार्य सागर से आशीर्वाद प्राप्त करके बुधवार को अनिवासी भारतीय आर्किटेक्ट स्नेहिल पटेल संस्कारधानी आए। वे सागर एवं दयोदय तीर्थ जबलपुर में बन रहे पाषण जिनालय के मुख्य आर्किटेक्ट हैं। उन्होंने बताया कि वेद पुराणों में वर्णित मंदिर वास्तु विधी से इन जैन मंदिरों का निर्माण किया जा रहा है। इन मंदिर निर्माण के फाउंडेशन में हजारों वर्ष पुरानी तकनीक एवं विधि का उपयोग कर खालिस चूने एवं पत्थर से फाउंडेशन बनाया जा रहा है। इस तकनीकी से न्यूनतम 20 प्रतिशत की बचत होती है और वर्षों तक टिकाउपन रहता है।
ज्येष्ठ मुनि योग सागर ससंघ का प्रवेश
गजरथ महोत्सव में धर्मप्रभावना करने संस्कारधानी आए ज्येष्ठ मुनि योग सागर ससंघ ने बुधवार को संजीवनीनगर गढ़ा में प्रवेश किया। संजीवनी नगर में आहार चर्या के बाद मुनि संघ ने शाम 4 बजे श्री पाŸवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर गढ़ा में प्रवेश किया। वहां संत निवास के लोकार्पण के संघ मुनि संघ ने प्रवचन में पंचकल्याणक महोत्सव का महत्व बताया। समिति के संयोजक सिंघई इंद्र कुमार जैन ने बताया, आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर गढ़ा में गुरुवार सुबह आठ बजे मुनि संघ की आहार चर्या सम्पन्न होगी।
उसके बाद मुनि श्री के दिगम्बर जैन मंदिर पुरवा होते हुए गजरथ महोत्सव स्थल की ओर विहार कर तैयारियों की समीक्षा करने की संभावना है। इस मौके पर ट्रस्ट कमेटी के रमेश चंद्र जैन, सोने लाल, इंदु जैन, मुन्ना गांधी, रज्जू जैन, रौनक जैन, राजेश सीए, मनीष जैन, गुड्डू भैया, विवेक जैन, ब्रह्मचारिणी बबली व कल्पना दीदी ने मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।