
panna judge manoj soni case
जबलपुर। पन्ना जिले के अजयगढ़ में पदस्थ सिविल जज मनोज सोनी के घर पर ताला जडऩे के लिए पन्ना एसपी रियाज इक़बाल और विवेचना अधिकारी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। चीफ जस्टिस हेमन्त गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इसे अवमानना की श्रेणी में पाते हुए दोनों अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह जवाब दो हफ्ते के भीतर दिया जाना है। कोर्ट ने जज सोनी के खिलाफ निचली अदालत में लम्बित मामले की आगे सुनवाई पर भी रोक लगा दी है।
यह है मामला
जज मनोज सोनी ने दायर याचिका में कहा, सतना निवासी महिला शासकीय कर्मी ने उनके खिलाफ अजयगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस पर उनके खिलाफ भादवि की धारा 498,376 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई। इतना ही नहीं, एसपी के निर्देश पर 28 मई को उनके आवास पर पुलिस ने ताला भी जड़ दिया। यह एफआईआर निरस्त की जाए और तालाबंदी के लिए दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
पहले ही अग्रिम जमानत
अधिवक्ता ब्रजेश दुबे ने कोर्ट को बताया, याचिकाकर्ता की जिला अदालत पन्ना से इस मामले में पहले ही अग्रिम जमानत हो चुकी है। दिल्ली ज्यूडिशियल ऑफिसर्स एसोसिएशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश हैं कि न्यायिक अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले सम्बंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश या हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुमति लेना जरूरी है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। बिना सूचना दिए और बिना कारण किसी के मकान पर ताला जडऩा भी सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के खिलाफ है।
शिकायकर्ता ने कहा था घर मे हैं साक्ष्य
मंगलवार को पन्ना एसपी रियाज इक़बाल की जगह विवेचना अधिकारी एसआई कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एफआईआर नियमानुसार दर्ज की गई है। उन्होंने बताया, शिकायतकर्ता ने आवेदन देकर कहा था कि मामले के कई अहम साक्ष्य जज सोनी के आवास पर हैं, इसलिए उनके घर पर तालाबंदी की गई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से क्षमायाचना भी की है।
Updated on:
10 Jul 2018 07:06 pm
Published on:
10 Jul 2018 06:57 pm
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