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मप्र की इस नदी का पानी काला पड़ा, अस्तित्व भी खतरे में!

मप्र की इस नदी का पानी काला पड़ा, अस्तित्व भी खतरे में!  

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pariyat river water

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प्रभाकर मिश्रा@जबलपुर। परियट नदी उद्गम स्थल से लेकर कई किलोमीटर तक वनाच्छादित क्षेत्र में स्वच्छ है, लेकिन आगे बढऩे के साथ ही प्रदूषित होती जाती है। नदी के जियोलॉजिकल सर्वे और सैम्पल टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा हुआ की रिहायशी इलाकों के बीच पहुंचकर नदी सबसे ज्यादा दूषित हो गई है। कई स्थलों पर तो प्रदूषण इतना ज्यादा हो गया है कि पानी का रंग पीला, काला, काला भूरा होने के साथ ही सभी कं टेट मसलन एल्केलिटी से लेकर टीडीएस का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है।

जियोलॉजिकल सर्वे और सैम्पल टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा, हर मानक पर फेल नदी का पानी

गोबर व प्रदूषण बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार परियट नदी में प्रदूषण का बड़ा कारण डेयरियों से निकलने वाला गोबर व सीवर, गंदे नालों का पानी का सीधे मिलना है। इसके कारण कई स्थानों पर पानी का प्रवाह बिल्कुल अवरुद्ध हो गया है। पानी के ऊपर गोबर व प्रदूषण फै लाने वाले कं टेंट की परत जम गई है। इससे नीचे का पानी भी सड़ रहा है। उसमें ऑक्सीजन की कमी होती जा रही है, जो जलीय जीवों के जीवन के लिए भी खतरनाक है।

इन स्थलों से जुटाए गए सैम्पल
जियोलॉजिकल सर्वे करने वाली टीम ने परियट नदी के आठ स्थान पर सैम्पल लेकर जांच की। इनमें वनाच्छादित क्षेत्र, फगुआ पंप हाउस, हेमिल्टन ब्रिज खमरिया, परसराम कुं ड के समीप, मोहनिया रप्टा, कंदराखेड़ा, बेलखाडू और हिरन से संगम स्थल शामिल है।

डेयरी अपशिष्ट व सीवर वेस्ट मिलने पर लगे रोक
परियट नदी का जियोलॉजिकल सर्वे करने वाली टीम और युवा क्र ांति के अनुराग तिवारी प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं कि नदी में डेयरियों का अपशिष्ट व सीवर वेस्ट सीधे तौर पर मिलने से रोक लगाई जाए। ऐसा करके परियट में प्रदूषण को काफी कम किया जा सकता है।

परियट नदी में डेयरियों का अपशिष्ट, सीवर का पानी, नालों का गंदा पानी सीधे तौर पर मिलने के कारण प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है। डब्लूएचओ के मानकों से नदी के मौजूदा पानी के कं टेट की तुलना की जाए तो संतुलन पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है। इसके कारण नदी में जलीय जीवों के जीवन को भी खतरा हो सकता है।
- विनोद दुबे, भूजल वैज्ञानिक