patan assembly election: जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा सीट से भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने कांग्रेस के नीलेश अवस्थी को हरा दिया...।
patan vidhan sabha seat. जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता एवं पूर्व मंत्री अजय विश्नोई चुनाव जीत गए। उन्हें एक लाख 13 हजार 223 वोट मिले और कांग्रेस प्रत्याशी नीलेष अवस्थी को 82 हजार 968 वोट मिले। हार-जीत का अंतर 30 हजार 255 रहा।
अजय विश्नोई ने पिछले 2018 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नीलेश अवस्थी को हरा दिया था। इस बार भी मुकाबला दोनों ही प्रत्याशियों के बीच है। अजय विश्नोई भाजपा के लिए हमेशा बागी तेवर दिखाते रहे। कई बार मुख्यमंत्री के लिए भी विश्नोई खतरा बने रहे। बावजूद भाजपा ने एक बार फिर विश्नोई पर भरोसा किया।
2018 में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही था। अजय विश्नोई को 100443 वोट मिले थे और कांग्रेस के नीलेश अवसथी को 73 हजार 731 वोट मिले थे। हार-जीत का अंतर 26 हजार 712 था। 2018 में पाटन विधानसभा सीट पर 2 लाख 33 हजार 186 वोटर्स थे। पुरुष वोटर्स की संख्या 122 हजार 816 थी, वहीं महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 10 हजार 368 थी। इनमें से 1 लाख 82 हजार 816 वोट डाले गए। 3180 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।
2008 की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी अजय विश्नोई चुनाव जीते थे। इनके बाद 2013 में कांग्रेस के नीलेश अवस्थी ने अजय विश्नोई को 12 हजार 736 वोटों से हरा दिया था।
जबलपुर जिले की विधानसभा सीट
कौन है अजय विश्नोई
61 साल के अजय विश्नोई मध्यप्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। शहर के अस्पताल में उनकी हिस्सेदारी हैं और वे मीसा पेंशन भी लेते हैं। जबकि इनकी पत्नी बिल्डर के व्यवसाय में है और किराए से अपनी आय चलाती हैं। 1977 में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से स्नातक, प्रोफेनल बीवीएससी एंड एएच किया था। उन पर कई धाराओं में प्रकरण भी दर्ज हैं। कोर्ट में मामले लंबित भी हैं।
कौन के नीलेश अवस्थी
पाटन के रहने वाले कांग्रेस प्रत्याशी नीलेश अवस्थी 40 साल के हैं और पोस्ट ग्रेजुएट, एमकाम, जीएस कालेज, जबलपुर से 1997 में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से पढ़े हैं।
पाटन क्षेत्र पर एक नजर
जबलपुर का पाटन विधानसभा क्षेत्र पूर्णतः कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां की काली उपजाऊ मिट्टी के कारण किसान काफी सुविधा संपन्न हैं। परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में मझौली विधानसभा को विलोपित कर उसका अधिकांश हिस्सा जोड़ दिया गया था। यह क्षेत्र एक समय जमीदारों, मालगुजारों और क्षत्रिय समाज के आधिपत्य में थे। यहां ओबीसी वोटर्स निर्णायक भूमिका में रहते हैं। जबकि ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं का भी वर्चस्व है।