
Bitiya@work
जबलपुर. शहर के लोग बिटिया एट वर्क के तहत बेटियों को लेकर दफ्तर पहुंच रहे हैं। दफ्तर में मम्मी-पापा की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने एक दिन कामकाज संभाला। इससे उन्हें कुछ नया सीखने और गर्व करने की अनुभूति का अवसर मिला। बेटियों ने भी कहा, वे भी बड़ी होकर पिता की तरह बनेंगी। शुक्रवार को किसी बेटी ने पैथोलॉजी लैब देखा तो किसी ने एजुकेशन के रिकॉर्ड चैक किए। कुछ ने वकालत करने और बिजनेस करने में दिलचस्पी दिखाई।
डॉक्टर बनकर करूंगी इलाज
ऑफिस-ब्लड बैंक, मेडिकल कॉलेज
बेटी का नाम : अंशु शर्मा
पापा का नाम : डॉ. ब्रजेंद्र शर्मा, ब्लड बैंक ऑफिसर
- ब्लड बैंक में मैंने ब्लड की टेस्टिंग, मैचिंग का तरीका देखा। पैथोलॉजी लैब में मशीनों से जांच की प्रक्रिया को समझा। मुझे मेडिकल फील्ड बेहद पसंद है। बड़ी होकर डॉक्टर बनूंगी।
अंशु शर्मा
मैं तो इंजीनियर बनूंगी
ऑफिस : कोचिंग सेंटर
बेटी का नाम : अदिति धनुका
पापा का नाम : आशीष धनुका
- कोचिंग सेंटर में बच्चे अपना कॅरियर बनाने आते हैं। इसमें टीचर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मंै इंजीनियर बनंूगी।
अदिति धनुका
मैं भी जज बनूंगी
ऑफिस : एडवोकट हाईकोर्ट मप्र
बेटी का नाम : आरती रजक
पापा का नाम : रामनरायण रजक
- परेशान लोग पापा के पास आते हैं। पापा उन्हें न्याय दिलाने में सहयोग करते हैं। जबकि, जज की सीट से फैसला करने का अवसर मिलता है। मैं भी जज बनना चाहती हूं।
आरती रजक
कम्प्यूटर इंजीनियर, राइटर बनूंगी
कार्यालय : वेटरनरी हॉस्पिटल
बिटिया का नाम : चारुवी श्रीवास्तव और सीपिका श्रीवास्तव
माता का नाम : डॉ. अपरा शाही, वेटरनरी विश्वविद्यालय
- मम्मी का शेड्यूल काफी व्यस्त रहता है। कई बार घर आने के बाद इमरजेंसी ऑपरेशन केस आने पर उन्हें वापस जाना पड़ता है। उन्होंने हमेशा यही बताया कि ड्यूटी सर्वोपरि है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो। मम्मी के साथ हॉस्पिटल आकर उनके काम को नजदीक से देखने, जानने का अवसर मिला। हम भी बड़े होकर कम्प्यूटर इंजीनियर और राइटर बनना चाहते हैं।
चारुवी एवं सीपिका श्रीवास्तव
प्रशासनिक सेवा में जाने की चाहत
कार्यालय : शासकीय कन्या उमावि करौंदीग्राम
बिटिया : गीतिका श्रीवास्तव, एमएसी बायो टेक्नोलॉजी
पापा : प्राचार्य रामकुमार श्रीवास्तव
- पापा ने मुझे हमेशा आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। वे स्कूल की सभी छात्राओं को अपनी बेटी मानते हैं, यह स्कूल आकर और बच्चियों से बातकर जाना। पापा की कुर्सी पर बैठकर स्कूल की सभी गतिविधियों को समझा। इसमें स्कूल के टीचर्स ने भी सहयोग किया। आगे चलकर प्रशासनिक सेवा, शिक्षा के क्षेत्र में जाने का इरादा है।
गीतिका श्रीवास्तव
Published on:
29 Sept 2018 02:30 pm
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