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जबलपुर । शहर का प्रमुख व्यवसाय पावरलूम आधुनिकीकरण से दूर है। यहां 250 से अधिक लूम हैं। इनमें मॉर्डन मशीनों का अभाव हैं। शटललेस लूम जैसी तकनीक अपनाकर लूम संचालक कारोबार को चार चांद लगा सकते हैं। नए उत्पाद के साथ रेडीमेड गारमेंट कारोबार की जरुरत भी पूरी कर सकते हैं। इस मशीन में यदि बीम का धागा टूटा तो मशीन रुकेगी, लेकिन कपड़ा खराब नहीं होगा। जबकि, परम्परागत लूम में डिफेक्ट आ जाता है।
पावरलूम में कॉटन की साड़ी, गमछा, लुंगी और चादर बनाए जाते हैं। इनका सीमित बाजार है। साड़ी महाराष्ट्र और गमछा व लुंगी दक्षिण के राज्यों में सप्लाई होती है। जानकारों का कहना है कि जो कपड़ा तैयार होता है उसकी गुणवत्ता उच्च किस्म की नहीं होती। इसलिए मूल्य या बाजार को पर्याप्त उठाव नहीं मिल पा रहा है। इसका बड़ा कारण लूम की पुरानी तकनीक है।
यह तकनीक और ऐसे मिलती है-
शहर की लगभग सभी लूम प्लेन हैं। इनमें आधुनिक मशीनें नहीं हैं। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में पावरलूम सर्विस सेंटर के प्रभारी एसके दुबे ने बताया कि वर्तमान में शटललेस लूम कारगर हैं। इनकी कीमत भी महज 90 हजार रुपए होती है। उन्होंने बताया कि इसमें भी सरकार की तरफ से 50 से 90 फीसदी सब्सिडी मिलती है। इसी तरह कुछ अटैचमेंट के जरिए भी मशीनों को मॉर्डन बनाया जा सकता है। इससे यह कारोबार तेजी से बढ़ सकता है।
300 से अधिक पावरलूम शहर में
200 से ज्यादा में होता है उत्पादन
प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष तीन हजार को रोजगार
90 फीसदी से ज्यादा हैं प्लेन लूम
बनते हैं गमछा, साड़ी, चादर और लुंगी
महाराष्ट्र व दक्षिण राज्यों में सप्लाई
आधुनिकीकरण के फायदे
कपड़ा उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी
डिफेक्टलेस कपड़ा तैयार हो सकेगा
नए उत्पाद तैयार हो सकेंगे।
अलग डिजाइन व रंगों का होगा उपयोग
डे्र्रस मटैरियल और चुनरी का उत्पादन
लूम संचालक भी आधुनिक मशीन लगाना चाहते हैं, लेकिन कई समस्याएं हैं। मूल जरूरत अधिक मात्रा वाली बीम और डाइंग मशीन है। यह अधिक कीमती होती है। इन मशीनों का प्रस्ताव पावरलूम क्लस्टर के तहत दिया गया है। इनके लगने से कारोबार बढ़ सकेगा।
अशफाक अंसारी, अध्यक्ष जबलपुर पावरलूम क्लॉथ मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन
Published on:
20 Aug 2018 07:00 am
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