
Private Medical Colleges big scam in Madhya Pradesh
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों के एनआरआई कोटे की एमबीबीएस सीटों से निष्कासित छात्रों के मामले पर गम्भीरता दिखाई है। जस्टिस आरएस झा एवं जस्टिस राजीव कुमार दुबे की डिवीजन बेंच ने बुधवार को इन कॉलेजों को फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछ है कि क्या निष्कासन के आदेश के चार माह बाद भी यह छात्र वाकई पढ़ रहे हैं? यदि हां, तो हलफनामे पर ५ अप्रैल तक इसकी वजह बताई जाए, वहीं राज्य सरकार को कहा गया है कि इन कॉलेजों के निष्कासित छात्रों के मूल दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।
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सूरत, गुजरात निवासी सौम्या खंडेलवाल, शुजालपुर निवासी शताक्षी दुबे व अन्य की ओर से याचिका दायर कर कहा गया है कि वे एनआरआई की निर्धारित परिभाषा के तहत आते हैं। इसके बावजूद उनके प्रवेश निरस्त कर दिए गए। हाइकोर्ट के निर्देश पर डीएमई ने एनआरआई कोटे के तहत दिए गए 114 एडमिशन की जांच की थी, इनमें से 107 एडमिशन गलत पाए गए। डीएमई ने 28 नवम्बर को यह प्रवेश निरस्त करने का आदेश जारी किया था। कहा था कि कॉलेज इन स्टूडेंट को रोल से हटा दें और उनकी फीस लौटाएं। इस आदेश से प्रभावित छात्रों ने चुनौती दी है।
चार माह से नहीं हुआ आदेश का पालन
वहीं खंडवा के प्रांशु अग्रवाल, आदिश जैन व अन्य प्रवेश से वंचित छात्रों ने मामले में कैवियट दायर की है। कैवियटकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि डीएमई ने १०७ अवैध पाए गए प्रवेश निरस्त करने के आदेश दिए थे। उक्त आदेश का पालन करने का प्रयास ही नहीं हुआ। चार माह बीतने के बाद अब भी यह छात्र सम्बंधित कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। अन्यथा कैवियटकर्ताओं को प्रवेश मिल जाता। इस पर कोर्ट ने निजी कॉलेजों को इस सम्बंध में शपथ पत्र देने के निर्देश दिए।
Published on:
29 Mar 2018 11:12 am
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