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जबलपुर। शहर की देसी शराब की एक दुकान। काउंटर पर कई लोग एक साथ सेल्समैन को पैसे दे रहे हैं। बाहर दोपहिया वाहनों की कतार लगी है। उन्हीं के बीच दो-तीन-चार के समूह में पीने वाले खड़े हैं। कुछ बैठे हैं। दुकान से थोड़ी दूर एक रिक्शा चालक रुकता है। रिक्शे को फुटपाथ से सटाकर पार्क करता है। इधर-उधर जाने किसको तलाशता है। शायद पुख्ता होना चाहता है कि उसका कोई परिचित तो नहीं देख रहा। जेब से मुड़े-तुड़े कुछ नोट निकालता है। फिर दूसरी जेब में हाथ डालता है। वहां से हाथ खाली निकलता है। दूसरे हाथ का नोट फिर से गौर से देखता है। कुछ बुदबुदाता है। फिर काउंटर पर चला जाता है। वहां से शायद सबसे छोटी बोतल ली। झटके में जेब में रखता है। काउंटर से कुछ चेंज लेता है और बाजू की दुकान पर पहुंच जाता है। वहां से पानी के पाउच और गिलास खरीदता है। वहीं पर एक सांस में जितनी लेकर आया था, उसे पी जाता है। डिस्पोजेबल गिलास डस्टबिन में फेंकने के बाद अपने रिक्शे पर चला जाता है। उसी समय उससे सवाल किया-क्या रोज ऐसे ही पीते हो? जवाब बड़ा दार्शनिक था। '... सब नाश हो गया। फिर भी रोजाना पीता हूं।Ó
दुकानों पर भीड़ ऐसी कि देखते रह जाएं
मप्र में शराब नीति में एक अप्रैल से बदलाव होगा। इसमें फिलहाल यह बात निकलकर आई है कि शराब सस्ती हो सकती है। 'होम बारÓ लाइसेंस मिलेंगे। देसी और अंग्रेजी शराब अब एक ही दुकान पर बिक सकेंगी। अब घर में चार गुना ज्यादा शराब रखने की अनुमति मिल जाएगी। शराब बिक्री सम्बंधी इन नीतियों के सामने आने के बाद जबलपुर शहर में मुख्य विपक्षी कांग्रेस सहित अन्य संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि सरकार ऐसा करके युवाओं को नशे की दुनिया में धकेलेगी। नई शराब नीति का विरोध हो रहा है। लेकिन, बहुसंख्यक आमजन इसकाविरोध तो छोडि़ए, बात करने को तैयार नहीं होते। शहर में किसी भी दुकान पर नजर दौड़ाएं। वहां कभी भी काउंटर खाली नहीं मिलेगा। कई दुकानों पर तो शाम को मेले जैसी भीड़ उमड़ती है। कलारी से लेकर अंग्रेजी शराब दुकानों पर लाइन में लगकर भी खरीदने वाले दिख जाएंगे। धक्के खाकर भी खरीदी करने और पीने वालों से बात करने के लिए 'किलो भरÓ का पेशेंस जुटाना पड़ता है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन करने वालों को अपनी बात मनवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
एक अप्रैल से बहुत कुछ बदलेगा, अंगूरी के साथ जामुनी भी बनेगी
नए वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होगी। इसमें अंगूर के अलावा जामुन से भी शराब बनाने की अनुमति रहेगी। विदेशी शराब सस्ती होगी। घर पर शराब रखने की सीमा बढ़ेगी। लोग पहले के मुकाबले चार गुना ज्यादा शराब घर पर रख सकेंगे। अभी तक घर में एक पेटी बीयर व छह बोतल शराब रखने की अनुमति है। सालाना आय एक करोड़ रुपए होने पर घर पर बार खोल सकेंगे। प्रदेश में शराब की नई दुकानें नहीं खुलेंगी। विदेशी शराब पर एक्साइज डयूटी 10 से 13 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय लिया है। नई आबकारी नीति में प्रावधान है कि से देशी और अंग्रेजी शराब की बिक्री एक ही दुकान से होगी। प्रदेश में 11 डिस्टलरी के जिलों में सप्लाई के लिए टेंडर जारी नहीं होंगे। ऐसे में सभी 11 डिस्टलरी को सभी सम्भागों में विदेशी शराब की तरह ही गोदामों में शराब रखनी होगी।
कांग्रेस सिर्फ विरोध करने की खानापूर्ति के लिए विरोध प्रदर्शन करती है। सरकार की नई शराब नीति में किसी तरह की कमी नजर नहीं आ रही। कांग्रेस वालों ने तो अभी तक नई नीति के बारे में पढ़ा भी नहीं होगा।
जीएस ठाकुर, नगर भाजपा अध्यक्ष
Published on:
05 Feb 2022 07:54 pm
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