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देर तो हुई है, फिर भी नर्मदा एक्सप्रेस-वे-मेट्रो ट्रेन की आस तो जगी

जबलपुर प्रशासन ने दिए संकेत, मुम्बई, दिल्ली और नागपुर की तर्ज पर रेल ट्रैक तैयार किया जा सकता है  

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ये है स्थिति
- 01 अक्टूबर, 2015 को बंद हुआ था छोटी लाइन ट्रैक
- 07 किमी लम्बा है ट्रैक
- 04 साल से रेलवे व प्रशासन के बीच जारी है बातचीत
- 40-50 हजार लोग रोज आते-जाते हैं ग्वारीघाट

जबलपुर। नर्मदा जयंती सहित कुम्भ और अन्य पर्वों पर लम्बे जाम से जूझने वाले ग्वारीघाट के बाशिंदों को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। छोटी लाइन चौराहे से ग्वारीघाट के बीच खाली हुए रेलवे ट्रैकपर नर्मदा एक्सप्रेस वे और मेट्रो ट्रेन की सौगात मिल सकती है। मुम्बई, दिल्ली और नागपुर की तर्ज पर इस रूट में नीचे सड़क और डवाइडर पर बने पियर्स में रेल ट्रैक तैयार किया जा सकता है। प्रदेश शासन इस प्रस्ताव को लेकर रेलवे के आला अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर रहा है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही प्रदेश शासन के आला अधिकारी इसे लेकर जबलपुर का दौरा भी कर सकते हैं। ग्वारीघाट क्षेत्र में पिछले एक दशक में तेजी से टाउनशिप विकसित हुई है। इससे यहां की आबादी बढ़ी है। ग्वारीघाट में बने नए रेलवे स्टेशन को नागपुर ट्रैक का महत्वपूर्ण स्टेशन माना जा रहा है। ब्रॉडगेज का ट्रैक बिछाने का काम पूरा होने पर नागपुर रूट की अधिकर ट्रेनें इस स्टेशन से होकर गुजरेंगी। ऐसे में जानकारों का मानना है कि ग्वारीघाट आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग जरूरी है।
मेट्रो ट्रेन के लिए बेहतर विकल्प
भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। अब जबलपुर की बारी है। तकनीकी जानकारों की मानें तो मेट्रो ट्रेन के लिए छोटी लाइन का खाली हुआ ट्रैक बेहतर विकल्प है। नर्मदा तट ग्वारीघाट सहित आसपास के क्षेत्र को बड़े तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की बात भी कही जा रही है। कलेक्टर भरत यादव ने कहा कि छोटी लाइन के खाली हुए ट्रैक की जमीन का मामला सुलझाने के लिए प्रदेश शासन के प्रमुख अधिकारियों और रेलवे के अधिकारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है। जल्दी ही प्रदेश शासन की टीम जबलपुर का दौरा करेगी। इस ट्रैक पर वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के साथ मेट्रो ट्रेन के लिए ट्रैक बनाने का भी प्रस्ताव है।