23 जून 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां वाटर हार्वेस्टिंग से भूगर्भ में पहुंचाया जा सकता है वर्षा जल, करने होंगे ये प्रयास

मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च के पास बड़े परिसर मौजूद  

less than 1 minute read
Google source verification
90 प्रतिशत भवन छह सौ व एक हजार वर्गफीट के, नियम 1500 का

water harvesting

जबलपुर। धरती का अमृत यानी पानी रसातल में समा रहा है। हर साल बारिश का पानी बहकर निकल जाता है। ऐसे में वर्षा जल के संवर्धन को लेकर हर क्षेत्र में आवाज उठ रही है। धर्म गुरुओं से लेकर पर्यावरणविदें का मानना है कि शहर के धार्मिक स्थलों में भी वाटर हार्वेस्टिंग कर करोड़ों लीटर पानी भूगर्भ में पहुंचाया जा सकता है।

वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए मौजूद हैं संसाधन
दरअसल शहर में बड़ी संख्या में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, आश्रम स्थित हैं। जिनके पास बड़े परिसर मौजूद हैं। जिनमें थोड़े से प्रयास से वाटर हार्वेस्टिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो सकता है।

इन्होंने सुझााए ये उपाए
मंदिर, मठों व अन्य धार्मिक स्थलों व आश्रमों में जल संवर्धन की दिशा में पहल करने के लिए सभी प्रमुखों से चर्चा कर उन्हें प्रेरित करेंगे। श्रद्धालुओं को भी संदेश देंगे कि वे वर्षा का जल भूगर्भ में पहुंचाने आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें।
स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, महामंडलेश्वर

गुरुद्वारा परिसर में जल संवर्धन के लिए काम हो इसके लिए आवश्यक पहल करेंगे। समाज के लोगों को भी प्रेरित करेंगे कि वे अपने घरों में वाटर हार्वेस्टिंग के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें।
सरदार रंजीत सिंह, सचिव, प्रेमनगर गुरुद्वारा

समय की सबसे बड़ी मांग है कि बारिश का जल भूगर्भ में पहुंचाया जाए और ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण कर उन्हें संरक्षित करें। संस्थाओं व समाज के लोगों को प्रेरित करेंगे की वे वाटर हार्वेस्टिंग के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
फादर रंजीत लकरा

read also: मप्र से रूठा मानसून, उम्मीद के बादल दे रहे धोखा

वाटर हार्वेस्टिंग के लिए पहल करने के साथ ही सभी को प्रेरित करेंगे कि वे भी भूजल संवर्धन के लिए वर्षा जल सहेजने आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें।
चंगेज खान, खादिम, कचहरी दरगाह