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राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, चंद्रग्रहण और भद्रा में वर्जित हैं ये कार्य, आप भी जानें

यह दिन साल के कुछ ऐसे दिनों में है, जिसके लिए मुहूर्त का जानना जरूरी है, ताकि बहनें एक निश्चित मुहूर्त में भाइयों को राखी बांध सकें

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Lalit Kumar Kosta

Aug 05, 2017

raksha bandhan

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जबलपुर। सोमवार को साल राखी बांधने के सही समय को लेकर लोगों में काफी संशय और उहापोह बना हुआ है, क्योंकि इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा और चंद्रग्रहण का दोहरा साया पड़ रहा है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन ही नहीं परिवार के सभी सदस्यों का एक बहुप्रतीक्षित त्यौहार है, जो वर्ष 2017 में 7 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. सत्येंद्र स्वरोप्प शास्त्री और सचिनदेव महाराज के अनुसार यह दिन साल के कुछ ऐसे दिनों में है, जिसके लिए मुहूर्त का जानना जरूरी है, ताकि बहनें एक निश्चित मुहूर्त में भाइयों को राखी बांध सकें और ईश्वर से उनकी आयुष्य व सफलता की मनोकामना मांग सकें।

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ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण दुर्लभ ही होता है। वर्ष 2005 में ग्रहण पड़ा था उसके बाद 12 वर्ष बाद dobara इसकी पुनरावृत्ति होने जा रही है। लेकिन समस्या सिर्फ ग्रहण की नहीं है। रक्षाबंधन पर सुबह के समय भद्रा रहेगी। ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगने के कारण कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाएगा। वहीं भद्रा में भी ऐसा कोई कार्य वर्जित है। चंद्रग्रहण रात 10.53 बजे से शुरू होगा इसलिए 1.53 बजे से सूतक लग जाएंगे। सुबह 11 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए सुबह 11.05 बजे से लेकर 1.52 मिनट यानी कुल 2 घंटे 47 मिनट तक का ही समय शुभ है।

सूतक में ध्यान रहे
सूतक लगने के बाद कुछ काम करने वर्जित होते हैं क्योंकि वातावरण में नकारात्मक उर्जा होती है। उसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर होता है। इसलिए ऐसे में कैंची, चाकू आदि का प्रयोग करने से बचें। गर्भवती महिलाएं ऐसा बिल्कुल न करें। खाने की कोई भी वस्तु खुली न रखें। सूतक लगने से पहले खाने की सभी चीजों में तुलसी का एक पत्ता जरूर डाल दें। हो सके तो ग्रहणकाल में खाने पीने से बचें।

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भाई-बहन के असीम प्यार को कच्चे धागों में पिरो कर अटूट रिश्ते के साक्षी रहे रक्षाबंधन के त्योहार के लिए शहर के बाजार सजकर पूरी तरह तैयार हैं। इस बार इस त्योहार पर देशप्रेम का भी रंग चढ़ा है। यही कारण है कि बाजार में सजी राखियों की दुकानों से चीनी राखियां लगभग गायब हैं। यदि किसी दुकानों में लगी भी हैं तो बहनें उसे खरीदना पसंद नहीं कर रहीं। दरअसल, भारत और चीन के बीच हाल ही में पनपे सीमा विवाद और चीन के रुख को लेकर सोशल मीडिया पर चीनी सामानों का विरोध खूब हो रहा है, जिसका असर अब व्यावहारिक तौर पर दिखने लगा है। बाजारों में दुकानदार चीनी माल लगा नहीं रहे हैं और लगा भी रहे हैं, तो खरीददार उसे खरीदने से इनकार कर रहे हैं। बच्चों की राखियों को छोड़कर बाजार से चीनी राखियां लगभग गायब हैं।

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