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जमीन के चक्कर में पेंडुलम बन गया रांझी सीएम राइज स्कूल

10 एकड़ जमीन को लेकर नहीं हो पा रहा निर्णय, तीन बार मिली जगह लेकिन विवादों में फंसी, अब तक भवन को लेकर तैयार नहीं हो सका मसौदा

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जबलपुर. सीएम राइज स्कूल रांझी जमीन के पेंच में फंसकर रह गया है। पिछले दो सालों से जमीन को लेकर यह स्कूल पेंडुलम की तरह झूल रहा है। जमीन तय होने के बाद कभी विवादों का पेंच फंस जा रहा है तो कहीं राजनैतिक पेंच। जिसके कारण अब तक स्कूल भवन का मसौदा ही तैयार नहीं हो सका है। शासन द्वारा सीएम राइज स्कूल के लिए करौंदीग्राम स्कूल का चयन किया गया है। स्कूल में करीब 1 हजार छात्र वर्तमान में अध्ययनरत हैँ। ऐसे में छात्रों को सुविधा भी नहीं मिल पा रही है तो वहीं हर बार नई जगह की तलाश को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
10 एकड़ जमीन की जरूरत
सीएम राइज स्कूल रांझी के तैयार होने वाले भवन के लिए 10 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इस जमीन में दो मंजिला स्कूल भवन के साथ ही इसमें हर विषय के लिए अलग से लैब, खेल मैदान, कॉमन रूम, कम्प्यूटर लैब् आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है ताकि स्कूल में छात्रों का संर्वागीण विकास हो सके। साथ ही आउटडोर सहित इनडोर गतिविधियां भी आयोजित की जा सके। वर्तमान में स्कूल के पास 2.5 एकड़ की जमीन है जबकि पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या फिलहाल 1000 के लगभग है।
इस तरह बदलती रही जमीन
1-शासन द्वारा ग्राम मोहनिया में स्कूल के लिए 10 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। लेकिन इसमें से कुछ हिस्सा फॉरेस्ट लैंड में आने के कारण यह जमीन विवादों में आ गई।
2-स्कूल के लिए नई जगह की तलाश शुरू की गई जो पिपरिया में आकर खत्म हुई। लेकिन यह जगह पनागर विधानसभा में लगने के कारण राजनीतिक फायदे नुकसान देखा जाने लगा। इस जमीन पर राजनीतिक रंग चढ़ने से अड़ंगा लग गया।
3-नई जगह के रूप में जमतरा सामने आया। यहां जगह एलाट की गई लेकिन इस बात को लेकर एतराज जताया गया कि जगह उबड़ खाबड़ होने के कारण फिलिंग में दिक्कतें होंगी। साथ ही कुछ जगह अतिक्रमण की बात सामने आने पर इनकार कर दिया गया।
अब क्या है
अब स्कूल प्रबंधन द्वारा नया प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा अधिकारी के माध्यम से प्रशासन को भेज दिया गया। इसमें रांझी िस्थति एलएनवाय स्कूल को सीएमराइज भवन में समाहित करने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन इस संबंध में संबंधित विभाग से भी सला मशविरा नहीं लिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी स्थल का निरीक्षण कर लिया। लोगों की आपत्ति है कि किसी बनी बनाई मजबूत शिक्षण संस्था को तोड़कर नए सिरे से काम करना कहा से तर्क संगत है।