
yellow Semal flower
जबलपुर . प्रदेश में विलुप्त हो चुके पीले सेमल के महज दो पेड़ अब जबलपुर में ही बचे हैं। जिनमें आए पीले फूलों ने राज्य वन अनुसंधान संस्थान (एसएफआरआइ) के वैज्ञानिकों के चेहरे खिल उठे हैं। इस दुर्लभ प्रजाति को बचाने में जुटे वैज्ञानिक पीले सेमल के पौधे उगाने की तैयारी में लगे हैं। इस साल 100 पौधे उगाने का लक्ष्य लिया है।
दुर्लभ पीला सेमल में आए फूल, शोध के साथ संरक्षण
एसएफआरआइ के वैज्ञानिकों का दावा है कि प्रदेश से पीला सेमल विलुप्त हो चुका है। जबकि लाल सेमल बहुतायत में पाया जाता है। पीले सेमल के दो पेड़ जबलपुर के ग्वारीघाट क्षेत्र में हैं, जिनका संरक्षण किया जा रहा है। सेमल में आए पीले फूल को बचाने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। इनमें से एक को संस्थान में शिफ्ट किया गया था, जो तैयार हो गया और पीले फूल आ गए हैं।
कई वजहों से खास
जानकारों के अनुसार पीला सेमल के फूल से लेकर जड़ तक औषधि के रूप में उपयोग में लाई जाती है। छाल का प्रयोग मूसली के रूप में किया जाता है। इसके फूल की पंखुड़ी से गुलकंद बनता है। वहीं, गोंद भी निकलती है। दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में पीले सेमल के पेड़ हैं। पर प्रदेश में यह विलुप्त की श्रेणी में गिना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जहां पीला सेमल खिलता है वहां उडऩे वाले पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी होती है।
ग्राफ्टिंग और बीज से तैयार होंगे पौधे
वैज्ञानिकों के अनुसार ग्राफ्टिंग और बीज के माध्यम से सेमल के नए पौधों को तैयार किया जाएगा। संस्थान में इकलौता पेड़ होने के कारण इसकी पत्तियों, टहनियों को तोडऩे पर प्रतिबंध लगाया गया है। पहले चरण में सेमल के 100 पौधों को तैयार किया जाएगा।
पीले सेमल की प्रदेश में और कहीं पहचान के प्रमाण नहीं मिले हैं। कई खासियतों वाला यह पेड़ विलुप्त होने की कगार पर है। इस पेड़ को फिर से पुर्नजीवित करने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. उदय होमकर, वैज्ञानिक, प्राजेक्ट डॉयरेक्टर, एसएफआरआई
Published on:
07 Mar 2023 11:06 am
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