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sarpagandha अब हुई और कारगार, वैज्ञानिकों की ईजाद की गई इन दो नई किस्म की खेती से हो जाएंगे मालामाल

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जारी दोनों नई किस्म

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जबलपुर। औषधीय गुणों से भरपूर सर्पगंधा अब और कारगर हो गई है। उष्ण कटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान (टीएफआरआई) के वैज्ञानिकों ने इसकी दो नई किस्में ईजाद की हैं। इसकी दो नई किस्मों में जड़ों की मात्रा और रासायनिक गुण ज्यादा पाए गए हैं। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दोनों किस्म को जारी कर दिया है। जंगल या खेतों में इन किस्मों को उगाकर सर्पगंधा को और उपयोगी बनाया जा सकता है।
इन राज्यों में फायदा
सर्पगंधा की नई किस्मों के लिए उपयोगी पाई गई है। समान जलवायु वाले अन्य राज्यों में इसका ट्रायल कर फायदा उठाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्पगंधा का उपयोग आयुर्वेद और एलोपैथि दवाइयां बनाने में होता है। हाइपरटेंशन एवं ब्लड प्रेशर के इलाज में भी यह प्रभावी है। सर्पगंधा का उपयोग आयुर्वेद में भी है। प्राचीन काल से रोगों से लडऩे के लिए इसका उपयोग अलग-अलग रूप में किया जाता रहा है।
15 राज्यों में रिसर्च
संस्थान के आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन प्रभाग ने वर्ष 2007 में सर्पगंधा (रावेफिया सरपेंटिना) पर रिसर्च शुरू किया। मप्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, केरला, गोवा, उत्तरांचल, असम, महाराष्ट्र सहित 15 राज्यों में जिना टाइप की सर्पगंधा का जीन बैंक में सुरक्षित किया गया है। अलग-अलग जलवायु वाले तीन भौगोलिक क्षेत्रों में ट्रायल किया गया। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं जबलपुर में ट्रायल के लिए पौधे लगाए गए। 18 माह बाद जड़ों के पकने पर प्रयोगशाला में जांच की गई। जांच में ये दोनों किस्में बेहतर प्रमाणित हुईं।
जड़ ज्यादा, तीन गुना रासायनिक तत्व
वैज्ञानिक डॉ. योगेश्वर मिश्रा केे अनुसार टीएफआरआई ने सर्पगंधा की टीएफआरआई आरएस-१ एवं टीएफआरआई आरएस-२ किस्म ईजाद की है। मप्र के छिंदवाड़ा की सर्पगंधा में अधिक जड़ और उड़ीसा अनगूल की सर्पगंधा में रिसरपीन ज्यादा मात्रा में पाई गई है। इसके पूर्व जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ने आरएस-१ और सीआईएमएपी लखनऊ की सीम सील किस्म ईजाद की थी।
रिसरपीन की मात्रा
टीएफआरआई आरएस-1 : 0.09 प्रतिशत
सीम सील : 0.03 प्रतिशत

जड़ की मात्रा
टीएफआरआई आरएस-2 : 28 से 35 ग्राम
आरएस-1 : 22 से 24 ग्राम