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पिंजरापोल गौशाला ट्रस्ट में हेराफेरी, ट्रस्टियों पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी

कलेक्ट्रेट कोर्ट का फैसला : पिंजरापोल ट्रस्ट के ट्रस्टियों के खिलाफ दर्ज कराई जा सकती है एफआईआर

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Court decision

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जबलपुर. गौ अभ्यारण्य के लिए आरक्षित जमीन, जो पिंजरापोल गौशाला ट्रस्ट के नाम पर दर्ज कर ली गई थी, वापस शासन के खाते में दर्ज की जाए। कलेक्टर कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फै सला सुनाया है। कुं डम के दशरथपुर, देहरीकला, कोलमुंही गांव स्थित ५०० एकड़ जमीन से संबंधित मामले में गड़बड़झाला प्रतीत होने पर कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी महेशचंद्र चौधरी ने स्वप्रेरणा से जांच का निर्देश दिया था। तहसीलदार ने जांच प्रतिवेदन में कहा है कि उक्त जमीन राजस्व खाते में शासकीय दर्ज थी। ट्रस्ट को जमीन उपयोग के लिए दी गई थी, लेकिन ट्रस्टियों ने उस पर भूमि स्वामी हक दर्ज करा लिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मामले में ट्रस्ट के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।

ये है मामला
गौ अभ्यारण्य के लिए आरक्षित ५३० एकड़ जमीन में से कुछ हिस्सा पिंजरा पोल ट्रस्ट के नाम दर्ज हो गया था। इसे लेकर राजस्व विभाग ने ट्रस्टियों को नोटिस दिया था। ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत आपत्ति में कहा गया है कि १९९१ से वह जमीन ट्रस्ट को पंजीकृत अभिलेख के माध्यम से प्राप्त हुई है। इसके बाद मामले की जांच कराई गई।

ये हुआ खुलासा
तहसीलदार प्रशांत अग्रवाल ने जांच प्रतिवेदन में कहा है कि वर्तमान में ट्रस्ट के नाम पर दशरथपुर गांव में ८७.४१ हेक्टेयर, कोलमुही में ८७.५५ हेक्टेयर, देहरीकला में २७.२३ हेक्टेयर समेत ५०० एकड़ भूमि अभिलेख में दर्ज है। यह जमीन १९५४-५५ के अधिकार अभिलेख में प्रदेश शासन के नाम दर्ज थी। १९६१-६२, ६२-६३ के पांच ***** खसरे में भी सरकार के नाम (चराई-कटिबंध, आम निस्तार ) दर्ज थी। १९६३-६४ की ग्राम किश्तबंदी में इस ग्राम में खाते की जमीन दर्ज नहीं है। १९६७-६८ की किश्तबंदी में पिंजरापोल गौशाला जबलपुर के प्रेसीडेंट सेठ रामकुमार साकिन जबलपुर सरकारी पट्टेदार लगान शामिल हैं। इस प्रविष्टि में किसी भी आदेश का उल्लेख नहीं है। उक्त जमीन ट्रस्ट को डीड ऑफ ग्रांट के आधार पर चराई के लिए दी गई थी।