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जबलपुर. नए साल में जिले के 893 गांवों के लोगों को खुशखबरी मिलेगी। शासन की स्वामित्व योजना के तहत उनके अधिकार अभिलेखों का अंतिम प्रकाशन हो गया है। जल्द ही उन्हें उस भूमि का मालिकाना हक मिलेगा, जिन पर उनकी कई पीढिय़ा रह चुकी हैं। शासन ने इसकी प्रक्रिया तेज कर दी है। ग्रामीण क्षेत्र में संचालित स्वामित्व योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो वर्षों से गांवों में निवास कर रहे हैं। अभी उनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, जिससे वे यह साबित कर सकें कि वे उस भूखंड के मालिक हैं। योजना में साल के आखिरी माह दिसंबर में काम में तेजी आई है। नतीजतन 1285 गांवों में से 893 गांवों के अधिकार अभिलेख तैयार कर लिए गए हैं। आगामी समय में उन्हें अभिलेख सुपुर्द किए जाएंगे।
योजना के तहत 1313 गांवों के प्रकरण तैयार किए गए हैं। इनमें से 1285 गांव ऐसे हैं, जिनकी ग्राउंड ट्रूथिंग यानी ड्रोन फ्लाई के साथ सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से नक्शे तैयार किए गए हैं। उनका भौतिक सत्यापन भी पटवारियों ने किया है। इनमें 940 प्रकरण ऐसे हैं, जिनका द्वितीय प्रकाशन हो चुका है। तीसरा यानी अंतिम प्रकाशन 900 गांवों का हुआ है। 50 प्रकरणों में प्रक्रिया पूरी होनी श्ेाष है।
मझौली सहित कई तहसील पीछेलोगों को उनकी भूमि का हक दिलाने के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों की कुछ तहसीलें पीछे हैं। यहां अधिकार अभिलेख के अंतिम प्रकाशन की गति धीमी है। 28 दिसंबर की स्थिति में कुंडम तहसील के पास सबसे ज्यादा 16 प्रकरण अंतिम प्रकाशन के लिए शेष हैं। पनागर में 9, मझौली और शहपुरा तहसील में 8-8 प्रकरण लंबित थे।
तहसील गांवों की संख्या अंतिम प्रकाशन
पाटन 214 202मझौली 203 11
शहपुरा 213 140कुंडम 185 132
पनागर 160 114जबलपुर 157 152
सिहोरा 144 142गोरखपुर 07 00
रांझी 01 00
Published on:
01 Jan 2023 07:32 pm
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