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यहां बह सकती हैं दूध की नदियां, जरूरत है नए प्रयास की

दूध का बड़ा उत्पादक है जबलपुर, चारे-पानी की आसान उपलब्धता के साथ जलवायु भी अनुकूल  

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milk supply in ajmer

milk supply in ajmer

ये है स्थिति
- 600 डेयरी हैं जिले में
- 200 बड़ी और 400 छोटी डेयरी
- 03 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है
- 2.5 लाख लीटर है स्थानीय खपत
- 50 हजार लीटर दूध नागपुर सहित अन्य शहरों मेें भेजा जाता है
जबलपुर। चारों ओर नदियों के बेसिन से समृद्ध जबलपुर दूध का बड़ा उत्पादक है। यहां की जलवायु डेयरी उद्योग के अनुकूल होने और पर्याप्त मात्रा में चारा-पानी उपलब्ध होने से जिले में अच्छी गुणवत्ता का दूध मिल रहा है। नागपुर समेत अन्य शहरों को भी बड़ी मात्रा में दूध भेजा जाता है। जानकारों के अनुसार यदि ठोस प्रयास किए जाएं तो शहर में दुग्ध उद्योग आकार ले सकता है। इससे शहर में ही वृहद स्तर पर सह दुग्ध उत्पाद बनेंगे। रोजगार के अवसर बढऩे से युवाओं को भी काम मिलेगा। डेयरी संचालक खली, चुनी, चोकर, मक्का दाना सहित अधिकतर पशु आहार महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, कटनी, सिवनी, मंडला, गाडरवारा से मंगवाते हैं। लॉकडाउन के दूसरे और तीसरे चरण के दैरान खली, चुनी, चोकर की आपूर्ति नहीं होने से डेयरियां में पशुओं के आहार की कमी हो गई थी। हालांकि अब उपलब्धता सामान्य हो रही है।
आपूर्ति ठप, कलेक्शन सेंटर में
स्थानीय स्तर पर शहर में प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से ढाई लाख लीटर दूध की खपत नगर में हो जाती है। 50 हजार लीटर दूध नागपुर व अन्य शहरों में भेजा जाता है। लॉक डाउन के कारण दूसरे शहरों में सप्लाई नहीं हो पा रही थी। ऐसे में नगर स्थित तीन कलेक्शन सेंटर में दूध खरीदा जा रहा था। सामान्य दिनों में कलेक्शन सेंटर में 7.10 रुपए की दर से प्रति फै ट दूध खरीदा जाता है। लॉकडाउन के दौरान इसकी कीमत 4.50 रुपए प्रति फै ट दूध हो गई। इससे डेयरी संचालकों को नुकसान हो रहा है। डेयरी एसोसिएशन के सदस्य दिनेश पटेल ने बताया कि पशुपालक स्वयं के प्रयासों से डेयरी का संचालन कर रहे हैं। जिले की स्थितियां दूध उत्पादन के अनुकूल हैं। यदि ठोस प्रयास किए जाएं तो यहां दुग्ध उद्योग आकार ले सकता है। इससे दूध के सह उत्पाद बनेंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।