16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लोन देकर कहते हैं रोजगार करो, यह नहीं बताते कि ठेले-टपरे लगेंगे कहां?

हॉकर जोन विकसित नहीं होने से सड़क किनारे लग रहीं दुकानें, जगह-जगह लगता है जाम  

2 min read
Google source verification
shops

shops

-1१ हजार के करीब लोगों को दिया जाएगा 10 हजार रुपए लोन

-1१ हजार लोगों को दिया जाएगा 20 हजार रुपए का लोन

-20 हजार फुटकर विक्रेता शहर में पहले से हैं निगम के आंकड़ों में

श्याम बिहारी सिंह@ जबलपुर। शहर में पीएम स्वनिधि योजना के तहत लोन देकर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, नगर निगम के जिम्मेदार यह ध्यान नहीं देते कि ठेले-टपरे लगेंगे कहां? शहर में हॉकर जोन गिनती (तकरीबन छह) के हैं। विकसित एक को भी नहीं किया गया। कर्ज लेकर स्वरोजगार करने वाले शहर भर में सड़कों के किनारे, लेफ्ट टर्न, चौराहों पर ठेले-टपरे सजा लेते हैं। निगम का बाजार विभाग बैठकी वसूल लेता है। रोजाना शहर के तमाम हिस्सों में ठेलों-टपरों, फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों से जाम लगता है। अतिक्रमण हटाने वाला अमला कभी-कभार कार्रवाई करके खानापूर्ति कर देता है। अगले दिन फिर से दुकानें वहीं जम जाती हैं।

फिर बढ़ेंगे हजारों छोटे दुकानदार

पीएम स्वनिधि योजना के तहत निगम के जिम्मेदारों ने इस साल करीब 2२ हजार लोगों को स्वरोजगार से जोडऩे के लिए 10 हजार से लेकर 20 हजार रुपए तक का लोन देने का लक्ष्य है। इसे अच्छी पहल कही जा रही है। लेकिन, ये लोग फुटकर व्यापार कहां करेंगे? इसके लिए कोई इंतजाम नहीं दिख रहा। बीते साल करीब नौ हजार लोगों को स्वरोजगार के लिए लोन दिया गया था। उनमें से ज्यादातर लोग फुटपाथ, सड़क, चौराहों पर सब्जी, फल के ठेले, चाय-पान-चाट के टपरे लगा रहे हैं। कुछ ने घर से रोजगार शुरू किया है। उनका कहना है कि हॉकर जोन विकसित किए जाएं। लोग आने लगें। बिक्री बढ़ जाए। तभी वे वहां दुकान लगाएंगे।

विकसित करने की दरकार

पीएम स्वनिधि योजना से फायदा हो रहा है। लेकिन, इसमें तकनीकी समस्या यह है कि निगम सिर्फ लोन दिलाने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझता है। लोन लेकर व्यवसाय शुरू करने वालों को व्यवस्थाएं और माहौल देने में उसकी कोशिशें नाकाफी हैं। रांझी, कछपुरा और कृषि उपज मंडी में अभी तक हॉकर जोन आकार नहीं ले पाए। इसका नतीजा यह है कि लोग फुटपाथ, सड़क, चौराहों पर व्यापार करते हैं। हालत यह हो गई है कि शहर का कोई भी फुटपाथ खाली नहीं दिखता। समोसा, चायनीज, चाय, पान, चाट, आइसक्रीम, कुल्फी, सब्जी-फल के ठेले- टपरे मनमाने अंदाज में लगाए जा रहे हैं।

पथ विक्रेताओं को रोजगार के उपयुक्तअवसर मुहैया कराने के साथ ही शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कछपुरा, छोटी लाइन चौराहा के पास व दमोहनाका से दीनदयाल चौक समेत अन्य स्थान पर नए हॉकर जोन विकसित किए जा रहे हैं।

आशीष वशिष्ठ, आयुक्त,नगर निगम