
The garment business of Jabalpur, which has made a mark in many states, is again touching the heights.
जबलपुर@ज्ञानी रजक. कई राज्यों में पहचान बना चुका जबलपुर का गारमेंट कारोबार फिर ऊंचाइयां छू रहा है। नई वेरायटी के सूट और कुर्ती की मांग ने जोर पकड़ लिया है। परंपरागत ग्राहकी वाले दक्षिण के राज्यों के साथ महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ से थोक खरीदार बुकिंग करने पहुंच रहे हैं। निर्माताओं के पास कोरोनाकाल के बाद बेहतर काम है। सूट के साथ लोवर, शर्ट, बच्चों के कपडे़, कोटशूट, शेरवानी, जींस व स्कूल डे्सेस का उत्पादन तेज हो गया है।
शहर में छोटे एवं बडे़ 400 से अधिक कारखाने संचालित होते हैं जिनमें एक से बढ़कर एक डिजाइन के सलवार सूट तैयार किए जाते हैं। इनकी बनावट और कीमत कई राज्यों की महिलाओं के लिए पहली पसंद होती है। जब त्योहार आते हैं तो वे यही की बने सलवार सूट खरीदती हैं। ओडिशा और महाराष्ट्र में गणेश पर्व को लेकर यहां बने कपड़ों की बड़ी मांग में उठाव आया है। वहां के विक्रेता जबलपुर आए हैं।
हर इकाई में अलग तरह के वस्त्र
शहर के अलावा जबलपुर में अब रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर भी बनकर तैयार हो चुका है। यहां पर छोटी और बड़ी 200 इकाइयां संचालित हो रही हैं। इनमें अलग-अलग वेरायटी के वस्त्र बनाए जा रहे हैं। 80 प्रतिशत वस्त्र सलवार सूट ही हैं। निर्माता रजनीश अग्रवाल ने बताया कि अभी वेस्टर्न ड्रेसेस का पैटर्न ज्यादा चल रहा है। यहां पर अब कॉटन, रेयान, जार्जेट और सिंथेटिक कपडे़ की कुर्ती तैयार हो रही हैं। सूट में भी फैवरिक, नेट, बेलवेट, जेकॉट (सिल्क बेस) के अलावा इंपोर्टेड कपडे़ के सूट भी बनाए जा रहे हैं।
यह है िस्थति
- 400 से ज्यादा छोटी-बड़ी इकाइयां।
- 30 हजार से ज्यादा को मिला रोजगार।
- सलवार सूट की कई वेरायटी होती हैं तैयार।
- दस राज्यों में होती है सलवार सूट की सप्लाई।
- 300 करोड़ रुपए तक का सालाना कारोबार।
- गारमेंट क्लस्टर में 200 इकाइयां संचालित।
बच्चों के कपड़ों का भी बढ़ा चलन
गारमेंट क्लस्टर में महिला परिधानों के अलावा बच्चों की पोशाक भी तैयार की जाने लगी हैं। इनके कुछ ब्रांड भी हैं। निर्माता शुभांशु जैन ने बताया कि कोटी कुर्ता, पैजामा, इंडो वेस्टर्न सूट भी तैयार किए जा रहे हैं। अब यहां पर व्यापक तौर पर लोवर भी तैयार हो रहे हैं। इनकी जबलपुर के अलावा दूसरे शहरों में भी खूब मांग है। कारेाबारी सुनील चांदवानी ने बताया कि क्लस्टर में सिफॉन फेबरिक पर फ्लोरल प्रिंट की फ्रॉक, टॉप, गाउन कुर्ती, कॉटन फेवरिक, कुर्ती विथ प्लाजो, प्लाजो पेंट, रेयान फेबरिक पर फुल लैंथ गाउन आदि मटेरियल और वेरायटी के सूट की मांग ज्यादा है
प्रदेश में भी फैलने लगा कारोबार
300 करोड़ रुपए से ज्यादा के सालाना कारोबार वाली इस इंडस्ट्री के उत्पाद अभी तक तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में बिकते हैं। लेकिन अब मध्यप्रदेश में भी निर्माताओं ने इनकी बिक्री शुरू कर दी है। जबलपुर के आसपास के जिलों के अलावा बडे़ शहरों से थोक कारोबारी यहां आ रहे हैं। उन्हें सलवार सूट के अलावा अन्य वस्त्र अच्छे दामों में मिल रहे हैं। जबलपुर गारमेंट एंड फैशन डिजाइन क्लस्टर एसोसिएशन के एमडी दीपक जैन ने बताया कि क्लस्टर में सभी इकाइयों में उत्पादन हो रहा है। यहां अलग-अलग प्रकार के वस्त्र तैयार हो रहे हैं।
Updated on:
12 Aug 2022 12:40 pm
Published on:
12 Aug 2022 12:35 pm

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