
same-sex marriage
पत्रिका. समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर संस्कारधानी के संत चिंतित हैं। सोमवार को संतों के नेतृत्व में शहर के नागरिकों ने राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। नरसिंह पीठ के महंत डॉ. नरसिंह दास, महंत कालीनंद व साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने कहा कि विवाह संस्था समाज की व्यवस्था का आधार है। संतों ने कहा कि भारत का संविधान विधायिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन स्थापित करता है। इसलिए विवाह को नए तरीके से परिभाषित करना, उसे नए स्वरूप में लिखना, विधायिका से कानून बनाने की शक्ति ले लेना माना जाएगा। अत: यह निर्णय संसद को लेने दिया जाए एवं सभी पहलुओं पर समग्रता से विचार किया जाए। महंत राजारामाचार्य, महंत रामजीशरण, महंत प्रकाशानंद, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, साध्वी संगीता गिरी, स्वामी रामेश्वरानानद, महंत रामानंदपुरी, मयंक शास्त्री व अन्य मौजूद थे।
महिलाओं ने सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देने की मांग को लेकर महिला संगठनों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सोमवार को कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। लक्ष्मी सरोकार समिति कटंगा, केसरिया हिंद वाहनी, अखिल भारतीय ब्राम्हण एकता परिषद सहित अन्य संगठनों की ओर से अंजू भार्गव, पुष्कल चौधरी, अमिता स्वामी मौजूद थे।
Published on:
02 May 2023 11:22 am

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