18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ई-केवायसी में अटकी सम्मान निधि, हजारों किसान नहीं आ रहे आगे

जबलपुर राजस्व अमला नहीं दे रहा ध्यान  

less than 1 minute read
Google source verification
The hope of the farmers was broken by the hail, the crop is visible but there are no grains left, nothing will come to hand

The hope of the farmers was broken by the hail, the crop is visible but there are no grains left, nothing will come to hand

जबलपुर। जिले के 18 हजार 800 किसानों प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि नहीं मिल पा रही है। वे इस लाभ के लिए पात्र हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने खाते का ई-केवायसी नहीं कराया है। ऐसे में उनके खातों में राशि नहीं आ रही। राजस्व अमला भी उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित नहीं करा पाया।
जबलपुर. किसानों को केंद्र और राज्य सरकार सम्मान निधि योजना के तहत अलग-अलग किश्तों में सालभर के भीतर 10 हजार रुपए मिलते हैं। यह उनके खातों में आती है। इसके लिए बैंक खातों का ई-केवायसी जरूरी होता है। इसके लिए अपना आधार बैंक खाते से जुड़वाना पड़ता है।

जिले में एक लाख 50 हजार से ज्यादा किसान इस योजना के लिए पात्र हैं। इन्हें केंद्र सरकार छह हजार और राज्य शासन चार हजार रुपए देती है। कुछ किसानों के खातों में कई तरह की तकनीकी समस्याएं हैं। इसलिए उन्हें परेशानी हो रही है, लेकिन ज्यादातर लम्बित प्रकरणों में किसानों ने ईवायसी नहीं कराया है।

शहपुरा क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रकरण
जिले की तहसीलों में शहपुरा में सबसे ज्यादा ऐसे प्रकरण हैं, जिनमें खातों का ई-केवायसी नहीं कराया गया है। यहां 33 सौ प्रकरण लम्बित हैं। जबलपुर और कुंडम तहसील में 2253 और 2285 प्रकरण हैं। पाटन, पनागर और मझौली में दो-दो हजार प्रकरण अटके हैं। सबसे कम 14 सौ 25 प्रकरण सिहोरा में हैं।

तहसील--लम्बित प्रकरण

सिहोरा 1475
पाटन 1876
मझौली 1986
जबलपुर 2253
कुंडम 2285
पनागर 1908
शहपुरा 3368


पीएम और सीएम किसान सम्मान निधि का लाभ उन किसानों को मिलता है, जिन्होंने बैंक खातों में ई-केवायसी करवाया है। जिले में ऐसे 18 हजार से अधिक प्रकरण हैं, जिनमें यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में किसान योजना का लाभ लेने से वंचित हैं। वे बैंकों में यह प्रक्रिया पूरा कर सकते हैं।
ललित ग्वालवंशी, अधीक्षक, भू अभिलेख